0 नियम की समालोचक

निर्गुण परमात्मा (परमसार/ तत्व/0/सदाशिव) से प्रकृति के सगुण अस्तित्त्व की उत्पत्ति वैदिक ‘तत्व विज्ञान’ , तन्त्र के शैवविज्ञान, – दोनों में वर्णित है। उपनिषदों, सहित तमाम प्रसिद्ध तंत्र ऋषियों ने …

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कामभाव में कैसा आध्यात्म हो सकता है?

आदिकाल से सारे ऋषि मुनि भौतिकता को नष्ट करके स्व की चेतना के बोध को समाप्त करने के लिए कठोर तप करते रहे है। इस स्व बोध से रिक्त होने …

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आध्यात्म में ‘अणुमल’ क्या है?

मूलतत्व यानी वह परमात्मा; जिसे वैज्ञानिक भाषा में 0 कहा जा सकता है; निर्मल होता है। इसीलिए ‘अघोर’ (निर्मल) कहा जाता है। इसमें ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति तीन पॉवर पॉइंट वाले …

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धर्मालय को समझें

धर्मालय साधारण वेबसाइट नहीं है। यह सारे आधुनिक विज्ञान एवं वैज्ञानिक को आमंत्रित करते हुए और बहुत से स्थानों पर उनका खण्डन करती हुए उत्पन्न हुई है। मैं मानवता को …

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अज्ञानी ही तंत्र की आलोचना करते है

जिस प्रकार गाँधी वादियों के आधार पर गाँधी की, नक्सलवादियों के आधार पर मार्क्स की, आतंकवादियों के आधार पर इस्लाम का मूल्यांकन करना अज्ञानता है; उसी प्रकार बाजारू विज्ञापन चाप …

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काली क्या है? : भैरवी विद्या से सम्बन्ध

भैरवी विद्या एक मार्ग है। इसका वास्तविक नाम उधर्वनाम्नाय है। यह कौल-मार्ग भी कहा जाता है। इस मार्ग की विधियां प्रत्येक प्रकार की सिद्धि के लिए है।चाहे, वे किसी भी …

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विज्ञान आचरण संहिता पर नहीं प्राकृतिक सत्य पर आधारित होता है।

‘भैरवी चक्र रहस्य’ की आलोचना इसलिए होती है कि यह कामसूत्रों पर आधारित है; किन्तु सभी आलोचना कर्त्ताओं को यह समझ लेना चाहिए प्राकृतिक सत्य पर आधारित विज्ञान, मानवनिर्मित कृत्रिम …

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भैरवी विद्या: भ्रम निवारण

आजकल जो पोस्ट हमें प्राप्त हो रहे हैं; उसको पढ़कर लगता हैं कि भैरवी चक्र की विद्या के सम्बन्ध में अनेक भ्रम फैले हुए है। यह बौद्ध-धर्म, जैन-धर्म ओशो जैसे …

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कैसे माने कि यह विज्ञान है? ‘पृथ्वी’, ‘जल’, ‘वायु’, ‘अग्नि’, और उसका आकाश ‘तत्त्व’ नहीं है; फिर भी इसे तत्त्व कहा गया है।

अर्थ समझने में गलती है। वहां ‘पृथ्वी तत्व’, ‘जलतत्व’, ‘वायुतत्व’ आदि लिखा है। तत्व का अर्थ यहाँ परमसार है। इससे सबसे नजदीकी सूक्ष्म तरंगों को विशेषण लगातार तत्व कहा गया …

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वैदिक ‘पुरुष’ क्या है?

वह ब्रह्माण्ड में व्याप्त ऊर्जा-व्यवस्था की ही दूसरा नाम है। ब्रह्माण्ड उसका शरीर है। पुरुष सत्तात्मक समाज होने के कारण वैदिक सत्य पुरुषवाचक रूप में है। मुख्य वैदिक देवता और …

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