बारह भाव में मंगल का फल , उपाय एवं टोटके .

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6 ठा भाव

हिम्मतवाला , साहसी . दुष्कर कार्यों को अंजाम देनेवाला .व्यक्तित्ववाला , यशस्वी, न्याय प्रिय ; परन्तु अभिमानी . स्वयं के अहंकार के बाद भी वह त्यागी हगा; परन्तु इस त्याग में भी उसका स्व का ही भा होगा. कलम का धनी , जुबान का धनी , कलात्मकता का प्रेमी होगा. भाव 2 में यदि मंगल का कोई भी मित्र ग्रह हो, तो इस जातक की उन्नति के साथ इसके भाइयों की भी उन्नत्ति होगी और यह बहुत उंचा उठेगा.

शुक्र अच्छा हो या भाव 7 में शनि, बुध ,केतु हो, तो बेटे पोते परिवार की भरमार होगी.. वृहस्पति सूर्य और बुध अच्छे होने पर संतान की कमी न होगी, अपितु वह अच्छी होगी.

भाव 6 में मंगल हो, तो सूर्य अक्सर कमजोर होता है. वह आमदनी और नौकरी आदि के लिए उचित होता है, पर मंगल फिर भी प्रगट रूप से उजागर नहीं होता. इसके कारण जातक में गुस्सा और काम शक्ति दबी हुई होती है. बुध के साथ शुक्र हो, तो जीवन साथी से सम्बन्ध उचित नहीं रहते. ऐसे जातक प्रेम और सेक्स के मामले में छुपे रूस्तम होते हैं. कुंडली में शनि राहू उचित न हो, तो गुप्त संबंधों वाला बहुगामी होगा. शुक्र बुध में सम्बन्ध न बने, बुध के साथ शुक्र का कोई शत्रु हो तो, यह जातक जातिका ख्याली अय्याश होते हैं. इन्हें प्रत्यक्ष सम्बन्ध बनाने से डर लगता है.

संतान बाधा होती है, यदि सूर्य, वृहस्पति और बुध बाधित होते हैं, संतान नहीं होती. होती है, तो टिकती नहीं . केतु उचित दशा में न हो, तो संतान के दुःख आम होते हैं. बुध 12 भाव में हो, तो भाई बहन दुःख देते हैं.

उपाय —

  1. सोना न पहनें .
  2. शनि को उत्तम करने के लिए यथा संभव, मन्त्र जप या अनुष्ठान करें .
  3. दुर्गा जी एवं बहन और कन्याओं की पूजा करें .
  4. स्त्री, गाय और खेत की पूजा करें.
  5. किसी जातक या जातिका में मंगल 6, बुध 4 हो, तो इसके जन्म लेते ही इसके माता पिटा को, इसके लिए और इसकी माता के लिए मृत्युंजय यज्ञ करवाना चाहिए .
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