हमारे गुरु को देवी सिद्ध है। उनके शयन कक्ष में आलता लगे पैरों के निशान छोड़ जाती है।

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आपने यह नहीं लिखा की कौन सी देवी? खैर, आपके गुरु झूठ बोलते हैं। उन निशानों के आलता का परिक्षण करने पर पता चल जाएगा; क्योंकि आलता अब आसानी से प्राप्त नहीं होता। रंग प्रयुक्त होते हैं।

कोई भी देवी या देवता एक ऊर्जा समीकरण मात्र होते है। यह समीकरण हमारे भाव में बनता है। वह भाव गहन होने पर उनकी कल्पना की गयी छवि आज्ञाचक्र के मानस केंद्र में बनती है। जब भाव और गहन होता है, तो वातावरण में उस छवि का पॉजिटिव प्रोजेक्शन होने लगता है। यही उनका प्रकट होना है। यह केवल साधक को दिखाई देता है, अन्य को नहीं। इस अशरीर ऊर्जा समीकरण द्वारा आलता रुपी भौतिक सामग्री का प्रयोग और निशान छोड़ना, असंभव है। जो ऐसा कहता है, उससे सावधान !

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