स्त्री जातक : विवाह न होने के कुंडली योग (शास्त्रीय) (उपाय सहित)

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क्रमांक – 10 से आगे – (शत्रु – पाप- मित्र-क्रूर आदि के लिए शुरू के विवरण वेबसाइट पर देखें) उपाय के लिए लक्षणों से स्वयं करें ग्रह का उपाय देखें।

  1. सातवें भाव में बुध-शुक्र हों, पहले तीसरे , 11 वें खाने में पापी ग्रह हों या बुध-शुक्र के शत्रु हों। दूसरी स्थिति में शादी के बाद गड़बड़ी की सम्भावना रहती है। शुभ ग्रहों का कोई संयोग मिले, तो उसके शुभ फल से विवाह सम्भव है।

उपाय – पीपल में जल दें। हल्दी चन्दन का तिलक लगायें और सूर्य को अर्द्धांजलि दें। गले में ताम्बा या सोना पहनें।

  1. सातवें का शनि उच्च होता है, मगर यदि पहले , तीसरे एवं 11 वें में केवल पाप ग्रह हो; शुक्र दुश्मनों से घिरा हो और बुध भी शुक्र के शत्रु के प्रभाव में हों।

उपाय – शुक्र के शत्रु एवं पाप ग्रह का उपाय करें। गाय को चारा दें। काले कुत्ते को मीठा रोटी दें। सूर्य को अर्द्ध दें।

  1. लग्न राशि का स्वामी सप्तम में हो और सप्तम का स्वामी शत्रु ग्रह या पाप ग्रह के प्रभाव में हो।
  2. सातवाँ भाव, सातवें भाव की राशी का स्वामी , शुक्र तीनों पाप ग्रहों के प्रभाव में हो और बुध भी शुक्र के शत्रु से बाधित हो।

(पहला . दूसरा , तीसरा, नवमा, ग्यारहवाँ भाव सातवें की दशा को स्पष्ट करेगा। राशि का स्वामी ग्रह जहाँ बैठा हो, वहां की भी स्थिति उसको सातवाँ मानकर इसी प्रकार स्पष्ट होगी। यह सभी योगों मेंविचारणीय होगा)

उपाय- शुक्र के शत्रु और पापियों का उपाय करें।

  1. लग्न के राशि का स्वामी सातवें में हो और वहां कर्क राशि हो, चन्द्रमा द्वादश में हो, शुक्र या बुध शुक्र के शत्रु के प्रभाव में हो।

उपाय – शुक्र के शत्रु और सूर्य का उपाय करें। किसी पीपल के नीचे भैरव जी के नाम का दिया जलायें।

  1. द्वादश भाव में चंद्रमा या राहु हो और उन पर मंगल एवं शनि की पूरी दृष्टि पड़ रही हो; शुक्र एवं बुध शत्रु एवं पाप से घिरें हो।

उपाय- चंद्रमा और बृहस्पति का उपाय करें । सिर ढककर रखें। हल्दी-चन्दन का तिलक लगायें। शिवलिंग एवं पीपल पर जल चढ़ाएं । कालें या दो रंगे कुत्तों को रोटी दें।

  1. सातवें भाव में राहु पाप ग्रहों से युत हो या 1,2,3 , 9 , 11 से दृष्ट हो; शुक्र और बुध बाधित हो। बुध शुक्र के शत्रु से घिरा हो और शुक्र स्वयं भी शत्रु या पाप से प्रभावित हो।

उपाय – पापियों और शत्रु का उपाय करें।

  1. निर्बल चन्द्रमा 12 वें में हो और पाप ग्रह के साथ हो या दृष्ट हों (4, 6, 8 से) ; सातवें में दो पाप ग्रह की युति हो; शुक्र – बुध शत्रु के घेरे में हो।
  2. सातवें शनि राहु हो; शुक्र शत्रु से बाधित हो और बुध के साथ अपने या शुक्र के शत्रु हों।

उपाय – गले में ताम्बा सोना पहने । मदर के दूध में हल्दी का चन्दन लगायें । प्रातःकाल पीपल को जल दें । शुक्र के शत्रु का उपाय करें।

  1. कुंडली में सूर्य निर्बल हो, सातवें – आठवें हो या शत्रु से बर्बाद हो रहा हो; शुक्र एवं बुध – शुक्र के या स्वयं बुध के शत्रुओं से बर्बाद हो रहा हो। पूर्ण बली शनि की दृष्टि तीनों पर पड़ रही हो।

उपाय – शुक्र , सूर्य का उपाय करें। बरगद के जड़ की पीली मिट्टी, मदार के दूध में घोंटकर तिलक करें। शुक्र के शत्रु का उपाय करें। रात में पीपल के नीचे भैरव जी का दिया जलाएं।

  1. शुक्र, आठवें हो , उसे शनि राहु देख रहे हो , सातवें में मनाग्ल-चन्द्र हो, 12 वें में सप्तम मेष (राशि का स्वामी) हो , तो

उपाय – बीच के चारों खानों को देखें। 1-7 खाली हो, तो गले में मूंगा , कमर में शनि का ताबीज बाँधें। रोली चन्दन का तिलक लगायें और शुक्र के शत्रु का उपाय करें। यह खतरनाक योग है। शादी हो भी जाए, तो न होने से बुरा जीवन होता है।

  1. खाना 2 और 7 की राशि के स्वामी ग्रह पाप ग्रहों के साथ हों और लग्न या चन्द्र लग्न के खाने से तीसरे में हो।

उपाय- पाप ग्रहों का उपाय करें।

  1. लग्न में केतु, सप्तम में राहु –शनि या राहु –सूर्य और इन्ही दोनों की दृष्टि 9,11, 1, 2,3 से सातवें भाव पर हो।

उपाय- सातवें में राहु –शनि हो, सिर पर लाल सूती टोपी पहने । रक्त चंदन के तिलक लगायें। पीपल में प्रातःकाल जल दें। सातवें में राहु सूर्य के साथ हो, तो सूर्य और केतु का उपाय करें। कुत्तों , गाय को रोटी दें और सूर्य को अर्द्ध दें।

  1. शुक्र – मिथुन , सिंह, कन्या या कुम्भ राशि में पापी के साथ हो और बुध शुक्र के शत्रु के साथ हो।

उपाय – पापी का और शुक्र के शत्रु का उपाय करें।

  1. 6 वें , सातवें , आठवें में पापी ग्रह हों और शुक्र या बुध – शुक्र के शत्रु से घिरे हो।

उपाय- बुध को घेरे शुक्र के शत्रु का उपाय करें और पापियों के साथ उसको शांत करने वाले ग्रहों की समाग्री का प्रयोग करें या सम्बन्ध बनाएं। ( देखें – लक्षणों के अनुसार ग्रह शान्ति के उपाय, धर्मालय के वेबसाइट पर)

  1. चन्द्रमा और शुक्र एक –दूसरे के सातवें खाने में हों और दोनों में से किसी पर शुभ ग्रह की दृष्टि न हो।

उपाय – चन्द्रमा को बृहस्पति से, शुक्र को बुध से संयोजित करें। मन्दिर में दूध –चावल दें । सर पर पीले रंग का कुछ भी रखें , केसर का तिलक लगायें ; दुर्गा जी की आराधना करें और इनका अभिमंत्रित ताबीज पहनें।

  1. शुक्र पहले खाने (लग्न) में और सप्तम में केतु हो।

उपाय- कुत्ते को मीठी रोटी दें और ऐसी ही मीठी रोटी खेत में दबा दें।

विशेष – विवाह के बारे में जानने के लिए बुध, शुक्र , सातवाँ , नवमा, ग्यारहवाँ और तीसरा भाव देखें। स्त्री की कुंडली में चंद्रमा निर्बल हो और शुक्र बाधित हो , तो विवाह सम्बन्धी परेशानी आती है। पुरुष का बृहस्पति प्रधान होना शुभ होता है यदि वह नीच या बर्बाद न हो रहा हो; पर स्त्री का बृहस्पति जितना ही प्रबल होगा , वैवाहिक सुख में कमी आती है; ऐसा मेरा व्यक्तिगत अनुभव है। विवाह के न होने के यहाँ दिए गये योगों के अतिरिक्त भी बहुत से शास्त्रीय योग है; सारे योगों का वर्णन संभव नहीं ; इसलिए मुख्य सूत्र भी स्पष्ट कर दिया है। विद्वान् ज्योतिषियों की अपनी-अपनी राय भी होती है; पर मुख्य सूत्र पर सभी लगभग एक है।

अशुभ योग शांति के उपाय

यह प्रश्न हमेशा उठता रहता है कि जब भाग्य निर्धारित है, तो उसे परिवर्तित कैसे किया जा सकता है और जब परिवर्तन किया जा सकता है , तो उसका महत्त्व क्या है?

भाग्य परिवर्तित नहीं होता। एक ही वृक्ष के बीज उपजाऊ खेत, पत्थरों के बीच जमी मिट्टी और नदी के किनारे हो; तो उससे उत्पन्न वृक्ष अपनी नियति नहीं बदल सकता है । एक आराम से विकसित होगा, एक को कठिन परिश्रम पर भी विकसित होने का मानक कम होगा, एक सदा जल की धारा से भयभीत और प्रताड़ित होता रहेगा। यहाँ पुरुषार्थ या अपना प्रयत्न सीमित है। पत्थर के बीच फंसा वृक्ष अपनी जड़ों को छेद ढूंढकर फैलाने या मिट्टी ढूँढने के लिए स्वतंत्र है; नदी के किनारे का वृक्ष अपनी जड़ों को दूसरी ओर विकसित करने संतुलन बनाने के लिए। मनुष्य को दूसरों की भी सहायता मिल जाती है। नदी के वृक्ष में अतिरिक्त सहारा दिया जा सकता है, जड़ में मिट्टी डाली जा सकती है। पत्थर वाले में पत्थर चाहे न हटे , पर मिट्टी डालकर राहत पहुंचाई जा सकती है । ज्योतिष के उपाय कुछ इसी तरह के होते है; पर विश्वास न हो, मानसिक श्रद्धा न हो, तो कोई उपाय लाभ नहीं देगा। हमारा शरीर उन चीजों को स्वीकार ही नहीं करता, जिसमें हमारा ‘भाव’ न हो। ऐसे लोगों के लिए ज्योतिष नहीं है। ऐसे लोगों में सदा बुध प्रधान स्त्री/पुरुष होते है। ये स्वयं को ही सब कुछ समझते है और इनको लाभ भी इसी प्रवृति से मिलता है। नरकट, सरपत, बांस आदि बुध से सम्बन्धित होते है। ये बीज से नहीं ; अपनी जड़ों से उत्पन्न होते है और उन जड़ों पर भी इनकी कोई भावना नहीं होती।

 

ज्योतिष में इन पांच तरीकों से निदान किया जाता है –

  1. तांत्रिक टोटकों के द्वारा , जिन्हें आजकल सरल होने के कारण हर जगह प्रयुक्त किया जाता है।
  2. पूजा अनुष्ठान के द्वारा ।
  3. मंत्र दीक्षा के द्वारा।
  4. सिद्ध तांत्रिक यंत्र और सिद्ध तांत्रिक धारण यंत्र , जिनमें मन्त्र भी होता है।
  5. तांत्रिक अनुष्ठानों द्वारा।

इन उपायों की शक्ति उत्तरोत्तर बली होती है। पहले से दूसरा , दूसरे से तीसरा , तीसरे से चौथा , चौथे से पांचवा अधिक शक्ति शाली होता है।

 

किये-कराये से विवाह – बाधा और रक्षा

किसी युवती का विवाह रुकवाने से किसी को क्या लाभ हो सकता है? यहाँ धन या वारिस का अकोई मामला नहीं होता। पर ऐसे मामले होते हैं और इसके पीछे सदा कोई ईर्ष्यालु स्त्री होती है। पर इसके पीछे भी भाग्य दोष ही होता है। चन्द्रमा, राहु और शनि की गड़बड़ी ।

इनसे बचने के लिए निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखें –

  1. जहाँ संदिग्ध हों, कुछ दिया हुआ , खाने-पीने से पहले उसे सूंघ देख लें।
  2. मंदिर और पुरोहित या गुरु को छोड़कर किसी भी व्यक्ति द्वारा दिया गया ताबीज न लें , न बाँधें। अक्सर प्रसिद्ध धर्म स्थलों के नाम पर स्त्रियाँ इसे बांटती है। गलत 5% होती है, पर सतर्क रहे। पीर-दरगाह आदि के भी ताबीज से बचें।
  3. प्रसाद लेने में भी इसे ध्यान रखें।
  4. अपने बाल, नाखून , अधोवस्त्र , टूटे चप्पल, मोज़े आदि को लापरवाही से न फेंकें; बल्कि समेट कर ऐसी जगह फेंके जहाँ से वह किसी के हाथ न लगें।
  5. जादू-टोना से बचाव के लिए पैरों को तलवों सहित साफ रखें और सिर को ढककर रखें। सिर में सफाई रखें और रात में तेल (कोई भी) देते रहे।

 

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