शाबर मंत्र-सिद्धियाँ

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शाबर मंत्र ग्रामीण अंचल के तांत्रिक मंत्र होते है। सामान्य मान्यता है कि गुरु गोरखनाथ के एक शिष्य शाबरी ने इन मन्त्रों का प्रचलन शुरू किया था। इनमें मुख्य तौर पर तकनीकी और रासायनिक (जड़ी-बूटी, खनिज, जैविक तत्व) का प्रयोग होता है और इसी कारण से ये अत्यधिक शक्तिशाली होते हैं।

यद्यपि यहाँ पूरी विधि दी गयी है; पर बिना किसी जानकार को गुरु बनाये इनकी सिद्धि का प्रयत्न करना खतरनाक होगा। किसी को गुरु बनाते है, तो अपनी महीने भर की सम्पूर्ण आय और कोई अपनी प्रिय वस्तु गुरु दक्षिणा में देकर उसका विश्वास अर्जित करें।

यहाँ एक विशेष तथ्य उल्लेखनीय है। सनातन धर्म ने हर प्रकार के संत और साधकों को प्रतिष्ठा देकर गुरु और भगवान् की संज्ञा दी है। इसमें इस धर्म के विरोधी और अपमान करने वाले भी कर रहे है । शाबर मन्त्रों में भी कहीं-कहीं इसकी झलक दिखाई देती है। इसे एक विद्या के रूप में लेकर ही सोचें। अन्यथा न लें।

 

मसान सिद्धि

मन्त्र –

 ॐ नमो आठ खाट की लाकड़ी।

मंजू बनी की कावा।

भुवा मुर्दा बोले।

न बोले तो कालवीर की आन।

शब्द सांचा, फुरे मंत्र ईश्वरो वाचा।

ॐ नमः ह्रीं क्रीं श्री फट स्वाहा।

 

इस सिद्धि से वशीकरण सहित अनेक प्रकार की शक्तियाँ प्राप्त होती है। एक बोतल शुद्ध देसी मदिरा (यह औषधि सिद्ध होती है) , चमेली का फूल एवं तेल, लोबान लौंग, कपूर, कचरी, अतर, आटे से बना चौमुखा दीपक – इन्हें लेकर श्मशान में जाए। किसी जलती चिता के सामने दक्षिण कि ओर मुख करके बैठें। चमेली के तेल की बाती से तेल डालकर चौमुखा दीपक जलाए और एकाग्र होकर मंत्र का जाप करें।

कुछ समय बाद श्मशान में शोर मच जाएगा। तरह-तरह की डरावनी आवाजें सुनाई देंगी। लेकिन डरें नहीं और मंत्र का जपना प्रारंभ रखें । प्रत्येक रात्रि 9 से 1। 2100 मंत्र जाप कर अतर के छींटे दें और धरती पर सुरा चढायें।

इसके बाद एक आकृति प्रकट होगी। उसका चमेली के फूलों से स्वागत करके प्रणाम करें और वचन लें कि वह आपके द्वारा बताये जाने पर आपकी इच्छा का पालन करेगा और कभी आपको हानि नहीं पहुंचाएगा।

इसके बाद मंत्र पढ़कर जिस कामिनी को वश में करना हो, लौंग हवा में फेंकें।

 

बिरहना पीर सिद्धि

 

मन्त्र-

पीर बिरहना ।

फूल बिरहना ।

धुं धुंकार सवा सेर का तोसा।

वाय अस्सी कोस का धावा  करे ।

सात सौ कुंतक आगे चल ।

सात सौ कुन्तक पीछे चल।

छप्पन सौ छूरी चले।

छप्पन सौ वीर चले।

जिसमें गढ़ गजनी का पीर चले।

और भी भुजा उखाड़ता चले।

ॐ नमः गुरुदेव ह्रीं क्रीं फट स्वाहा

दक्षिण की तरफ मुख करके निर्वस्त्र होकर बैठें। सामने चर्बी का दीपक जलायें। चर्बी सांप की हो, तो ओर उत्तम हो, वरना काले बकरे की लें। 2100 मन्त्र का जप करने में सिद्धि मिलती है। जाप करके पीले सरसों लेकर इस मंत्र को पढ़कर सभी दिशाओं में फेंक दें। पुनः 108 मन्त्र का जप करें।

जिस युवती पर सरसों पढ़कर फेंकेंगे, वह वशीभूत होकर आपकी सेवा करेगी। इस सिद्धि से अन्य मनोकामनाएं भी पूर्ण की जा सकती है।

 

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11 thoughts on “शाबर मंत्र-सिद्धियाँ

  1. Kya bina deeksha ya guru ke koi prayog hai jo aam admi sikg ske aur woh dangerous na ho jaise nazar bandi Indrajal Tantra

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