यक्षिणी की अति गुप्त साधनायें (विधि)

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यक्षिणी साधना विधि

यक्छिणी के कई भेद हैं. यहाँ हम उस विधि को दे रहे हैं, जिसके द्वारा मंत्र और ध्यान रूप बदल कर किसी को भी सिद्ध किया जा सकता है .

यह शमशान की देवी है ़अत : इसकी साधना का शास्त्रीय स्थल श्मसान है .बरगद का बृक्छ इसका दूसरा शास्त्रीय स्थान है ़ पर आजकल ये अप्राशांगिक हैं, इसलिये एकान्त कमरा उचित है ़

विधि–स्नानमंत्र “सहस्त्रार हुँ फट्”. इसी मंत्र से दिग्बन्धन करें और आसन आदि शुद्ध करें .

समय –काल रात्रि (९से१) दिशा दक्छिण मुखी .

आसन –सूती लाल या सुनहला .वस्त्रभी .

यंत्र –षट्कोण के मध्य विन्दू,, वृत,अष्टदल कमल,चार द्वारों वाला चतुरस्त्र, कुमकुम-सिन्दूर-लालरंग-चमेली के फूलों का रस, लौंग से लिखें.२१०० मंत्र से सिद्ध करें.

न्यास– ह्रीं मंत्र से

यंत्र सामने प्रतिष्ठित करके पू,?जा करें .चमेली के तेल का चौमुखा दिया जलायें.

पूजन सामग्री — चमेली का फूल, लौंग,  कुमकुम, सिन्दूर, मदिरा  ,मांस, सुपारी या जो जो अभिलाषा हो .

सात्विक खीर पूरी आदि

रूपध्यान– यह भृकुटि चढाये गवीेली नारी का रूप है ,जो साँचे मे ढले कठोर पुष्टबदन वाली सुन्री है .यह सर से पाँव तक स्वणे चाँदी के आभूषणों से लदी है ़ भृकुटी जरूर तनी है, पर मुद्द्रा हास्य की है .

मंत्र–ऊँ ह्रीं क्लीं क्लीं ह्रीं ऐं ओं यक्छिणी फट् स्वाहा .

पूजा के बाद मानसिक सामथ्यके अनुसार संख्या तय करें.जप संख्या २५००० है .

देवी प्रत्यक्छ होने पर उसे वचनबद्ध Lk

रूपध्यान —

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5 Comments on “यक्षिणी की अति गुप्त साधनायें (विधि)”

  1. आचार्य जी राम राम, मैं संशय में हूँ कृपया निवारण करें, क्या ग्रहथ यह साधना कर सकता हैं।

  2. आदरणीय गुरुजी,
    देवी प्रत्यक्ष होने का क्या मतलब है?
    क्या वह भौतिक रूप में हमसे मिलती है या फिर सपने में या ध्यानस्थ होते वक्त दर्शन दे के बात करती है?
    कृपया जिज्ञासा का समाधान करें।

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