महादुगाे की गोपनीय तंत्र साधना

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स्थान–यह स्वाधिष्ठानचक्र की देवी हैं .यह चक्र कमर की हड्डी से कुछ ऊपर होता है .ध्यान देने पर अनुभूत होता है.इस चक्र की क्रियाशीलता में जो शक्ति काम करती है,उसे ही दुगाे जी कहा जाता है .यहाँ से सिन्दूरी रंग की उजाे तरंगों के रूप में निकलती है .

कथा रहस्य —इस चक्र से नीचै कमर के प्लेट के मध्य , जो चक्र होता है ,वह मूलाधार है और यहाँ काली का निवास माना जाता है. यहाँ से खूनी लाल रंग की उजाे निकलती है.यह शरीर में काम, क्रोध, हिंसा, आक्रमकता को वहन करती है .इन गुणों को भैंसे के सदृश्य माना गया है, जो किसी मयाेदा का पालन नहीं करता . जो माता को भी हवस का शिकार बनाने से नहीं हिचकता .यही रूपक का महिषासुर है. तंत्र साधना में मूलाधार की इस ऊजाे को खींच कर स्वाधिष्ठान में पहुँचाया जाता है, जहाँ दुगाे इसका वध कर देती है यानी यह ऊजाे बदल जाती हैऔर दुगाे के चक्र की शक्ति बढ़ जाती है .

रूप ध्यान का कारण —प्रश्न यह उठता है कि फिर जो प्रकट होता है या जिन रूपों  का हम ध्यान करते हैं ,वह क्या है .इस प्रश्न को हम सिद्धि साधना के गुप्त रहस्य में पहले ही बता चुके हैं.

मंत्र –दुगाे के कई मंत्र प्रसिद्ध हैं .कोई भी भाव से मिला चुन कर जपा जा सकता है .

सरल मंत्र–ऊँ दुं दुं दुगाेय नम:

यंत्र — षट्कोण के मध्य विन्दू, तीन रेखाओं का वृत, अष्टदल, चार द्वार वाला चतुरभुज, वृत में मातृका.पंखुड़ियों पर मंत्र . ओड़हुल,कुमकुम दालचीनी, सिन्दूरी एवं लाल रंग से लिख कर, २१०० मंत्र से किसी भी शुक्ल अष्टमी को यंत्र को पूजा के बाद सिद्ध करें.

आसन–ईशानकोण मुखी लाल सूती

वस्त्र–सिन्दूरी या गहरा गुलाबी लाल .

सामग्री –ओड़हुल के फूल, ईंख, खीर, पुआ, छेने की मिठाई, सिन्दूर, महावर, लाल चन्दन, धूप, आदि पूजा की सामग्री .

तिथि –शुक्ल पंचमी, अ्ष्टमी, नवमी, चतुदेशी को पूजा करके प्रारम्भ करे .

चन्दन –रक्त चन्दन में सिन्दूर मिलायें

हवन –घी, दूध, दही, अपामागे का पंचांग,  दूब, चावल, गूलर, गूलर की समिधा .

तामसी –मदिरा ,माँस, मछली, श्मसान का जल अतिरिक्त.हवन मे कबूतर, बकरे का मांस, परवा ,मदिरा, आदि .

तामसी साधनायें कुछ भोजन के बाद मदिरा को पहले देवी को अपेण करके पान करने के बाद होती हैं .

रूपध्यान–दुगाे के प्रचलित किसी रूप का ध्यान करें.

प्रारम्भ –पूजा घर में आसन के सामने यंत्र आँखों की ऊँचाई पर लगा कर दुगाे मंत्र से सामान्य पूजा करके यंत्र के विन्दू पर ध्यान लगा कर उसमें दुगा का प्रज्वलित रूप प्रकट हो रहा है, इसकी कल्पना करें .कुछ देर धान लगा कर उसी ध्यान में मंत्र जप करेंं़  संख्या अपनी शक्ति के अनुसार निधाेरित करें

जप संख्या सवा लाख होती है .हवन १२५०.अभाव में मानसिक हवन किया जाता है .

लाभ–लाभ की कहानियाँ घर घर प्रसिद्ध है .ऐसा क्या है जो इनकी कृपा से प्राप्त नहीं हो सकता?

अगला दुगाे की श्मसान साधना साधना .


 

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