बारह भाव में मंगल का फल, उपाय एवं टोटके.

धर्मालय के प्रसार में सहयोग करें

दूसरा भाव

दूसरे भाव का मंगल शुभ दशा में जातक को धार्मिक और सारे कबीले, परवार और दायरे के लोगों का रक्षक और पालक बनाता है. इसके सम्बन्ध बड़े दायरे में और शुभ होते है. मगर यह दूसरों को तो पालता है और जाने कितनों को बना देता है; परन्तु अपने लिए अक्सर शून्य ही होता है. कंगाल नहीं होता, पर हर समय पराई चिंता में खुद पर ध्यान नहीं दे पाता . यह इसकी फितरत होती है. जब यह इसे छोड़ेगा, इसकी आमदनी और प्रतिस्था गिरेगी.

दहेज़ या ससुराल से धन की मदद मिलेगी. औरत की बुद्धि और सहयोग से तरक्की होगी . स्त्री जातक को भी पति से सहयोग मिलेगा. पर यह जातक स्त्रियों के प्रति और जातिका पुरूष के प्रति कुछ अधिक ही आकर्षण रखनेवाले होंगे. इससे जीवन में समस्या उत्त्पन्न हो सकती है.

मंगल में इस जगह बुध या केतु का प्रभाव न मिले , तो ससुराल, पत्नी से लाभ होगा, यह जातक जातिका हुकूमत के महत्वाकांक्षी होंगे और सूर्य का सहयों मिले, तो इच्छा पूरी भी होगी ससुराल में चांदी या कुआं आदि चंद्रमा की चीजें सदा बनी रहनी चाहिए अन्यथा सूर्य और मंगल उसे और पत्नी को जला देंगे. पत्नी को भी चांदी का कदा पहनना चाहिए.स्त्री जातक के पति को चांदी का लाकेट पहनना चाहिए. वह भी सिव मैट्रन से सिद्ध. सिद्ध त्लाकेट या पाजेब आदि अधिक प्रभावी होता है. ८, ९ ,१०, १२, में बुध शुक्र हो, तो, धनी होगा.जब मंगल बाद हो, तो अपनी मौत लड़ाई झगड़े या गोलीबारी आदि में हो.

मंगल बाद हो, तो पत्नी के लिए या पति के लिए बुरा होता है. योगों के अनुसार पुरूष या तो कम होगा या अधिक होगा . दोनों दशा अशुभ ही होती है.

उपाय —

१. ससुराल में, अपने या जीवनसाथी के शरीर पर चांदी स्थापित करें.

२. राहू को देखें, अगर वह अशुभ हो रहा हो, तो उसका उपाय करें,

३.गणेश एवं लक्ष्मी की आराधना करें. मन्त्र ॐ और ॐ कमलाय नम: है .

धर्मालय के प्रसार में सहयोग करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *