मंगल की शुभ और अशुभ स्थिति.

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मंगल की शुभ स्थिति .

सूर्य और बुद्ध यदि कुंडली में साथ हों या किसी तरह मिल रहे हों, तो कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़ कर मंगल शुभ माना जाता है.

मंगल की अशुभ स्थिति.

कुंडली में सूर्य शनि का मेल हो रहा हो, तो कुछ विशेष दशा को छोड़ कर मंगल अशुभ होता है.

  1. राहू मंगल को देखे , तो अशुभ होता है. विशेषकर परिवार के बुजुर्गों के शरीर के दाहिने हिस्से में बीमारियाँ होती हैं. खुद सांस की बीमारी होती है. रक्त की भी.
  2. केतु मंगल साथ हों या दृष्टि से मिल रहें हों या आमने सामने हों, तो दोनों का फल खराब होता है. रक्त, पैर,,वाहन, संतान ,फेफड़ा ,कुत्ता जननेंद्रिय , मूत्र, धातू की बीमारी होती है. स्त्री मासिक की बीमारी से परेशान रहती है. दम्पत्ति में एक भी इस योग में हो, तो संतान बाधा होती है. की दशा का प्रभाव मंगल पर पड़ता है.
  3. बुध के अच्छे बुरे का प्रभाव मंगल पर पड़ता है. विशेषकर तब, जब शुक्र को वह अपनी सहायता नहीं दे रहा हो. तब, प्रेम, व्यापार, गृहस्थी, पत्नी या पति , खेत, संगृहीत धन सभी पर अशुभ प्रभाव पड़ता है.
  4. शनि अशुभ हो और मंगल पर उसका प्रभाव पद रहा हो, तो बहुत अशुभ होता है. नभी पद रहा हो, तो अशुभ ही होता है. सनी अच्छा हो, तो हर और सुभ होता है.
  5. सूर्य से संयोग किसी भी तरह हो रहा हो, मंगल शुभ् होता है.
  6. परम्परागत रूप से 1 ,4 ,7 ,8 ,12 में मंगल अशुभ समझा जाता है, पर इसकी अशुभ स्थिति केवल, शुक्र और बुध को प्रभावित करती है. 1 ,7 का विवाह और गृहस्थी के लिए , पत्नी के लिए या पति के लिए और 4 का माता और आमदनी , मानसिक शान्ति के लिए अशुभ होता है. 8 का मंगल जातक को मौत और हत्याओं से जोड़ता है. शनि प्रभावित हो, तो अपराध के क्षेत्र में, सूर्य प्रभावित हो, सेना पुलिस में.12 का मंगल मनुष्य को मस्तष्क से सबल, पर क्रोधी बनाता है…….. पर इन सबका हर हालत में एक ही जैसा प्रभाव नहीं होता. शुभ अशुभ के लिए पूरी कुंडली की गणना करनी चाहिए.
  7. मांगलिक के उपाय — उपर्युक्त योग के उपाय, तंत्र द्वारा ही संभव हैं. उसके टोटके या रत्न इत्यादि भी सिद्ध करके धारण करने से इन योगों के मंगल के प्रभाव से बचा जा सकता है. विवाह आदि के लिए पूजा कराने से कोई लाभ नहीं होता . मांगलिक का मांगलिक से विवाह भी इसका निदान नहीं है. चीता और मादा चीता को एक जगह या बिल्लियों को एक जगह रखने से उनका स्वभाव नहीं बदल जाता. वे लड़ते हैं और लड़ कर एक यातो मरता है या सरेंडर कर जाता है. यह कोई निदान नहीं है. चक्रों का उपाय ही कारगर होता है और खान पान एवं आचरण .

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