भैरव दीक्छा एवं साधना 

धर्मालय के प्रसार में सहयोग करें

य़ह दीक्छा एवं साधना विधि एक गुप्त भैरवी मागॆ की है .

योग्यता —साधक की उम्र 21 से 50 के मध्य होनी चाहिए. उसे स्वस्थ होना चाहिए .

स्थान— एकान्त कमरा या निजॆन या श्मसान

सामग्री —2100 भैरव मंत्रों से सिद्ध धतूरा, दालचीनी लौंग, कुमकुम, रोली, पंचरंगा से चित्रित यंत्र .

भैरव के जिस रूप की साधना करनी हो ,उसकी तस्वीर. या मानसिक ध्यान छवि .

सिन्दूर ,कुमकुम, ओड़हुल या चमेली का फूल,मधु, लौंग .बादाम और श्रद्धा के अनुसार नैवे‌द्य.

मिट्टी के दीपक ,सरसों तेल, रूई की बत्ती.

खोपड़ी आज एक दुलॆभ वस्तु है .इसके स्थान पर मिट्टी की हाँड़ी को काले रंग से रंग कर ,उसमें नेत्र काट कर .उसे सिन्दूर से पूरित करके लें .

आसन और वस्त्र —खूनी लाल रंग या काले रंग का . सूती ढीला .

दिशा —‌पश्चिम या दक्छिन रूपभेद के अनुसार .

मंत्र क्रोधभैरव—हुं हुं हुं क्लीं क्लीं क्रीं श्रीं क्रोधभैरवाय श्रीं क्रीं क्लीं क्लीं हुं हुं हुं फट् स्वाहा .

दी‌क्छा–इसकी दीक्छा भैरवी दीक्छा के समान होती है ,वहाँ देखें .केवल स्नान मंत्र और श्रृंगारमंत्रबदल जाते हैं.

स्नानमंत्र–हुं अस्त्राय फट् .श्रृंगारमंत्र–क्लीं

पूजा – भैरव जी को खोपड़ी को मान कर उसे सामने स्थापित करके अन्दर बाहर दिया जलायें. फिर मूल मंत्र से पूजा करेऔर नैवेद्य अपिॆत करके सवॆत्र मंत्रसिद्ध जल छिड़क कर रक्छा बन्धन करके आसन पर बैठ कर मंत्र जप करं .यह प्रतिदिन रात में 9बजे के बाद करना चाहिये .प्रतिदिन की पूजा केवल तीन बार मंत्र पढ़ करें.

  1. रूपध्यान—चित्रित चित्र के अनुसार या जिस रूप की साधना करना चाहते हैं  ,उसका कल्पना में .
धर्मालय के प्रसार में सहयोग करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *