भैरवी से पूजा हेतु अनुज्ञा प्रार्थना

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चूँकि भैरवी अब देवीरूपा हैं, इसलिए उससे पूजा की अनुमति ली जाती है। प्रार्थना फूल हाथ में लेकर चरणों पर चढ़ते हाथ जोड़कर यह प्रार्थना की जाती है। यहाँ संस्कृत में  जो कुछ कहा जाता है; उसे अपनी भाषा में कहना चाहिए। वह इस प्रकार है – ‘ हे काला तीत भगवती! हे शिवप्रिया। हे आदिमता योनिरूपा बीज, बिंदु, नाद को धारण करके विश्व की संरचना को उत्पन्न करने वाली महा देवी। हे कामेश्वरी। तुम समस्त सिद्धियों और कामनाओं को प्रदान करने वाली हो। मैं तुम्हारा पुजारी तुमको तिम्हारी पूजा करने की आज्ञा चाहता हूँ। अनुग्रहित करो।’

तब भैरवी वात्सल्य और प्रेम भाव से कहती है –“यह भी तुम्हारी लीला है।यह जानते हुए भी कि हम तुम्हारा ही प्रतिरूप हैं, तुम मेरी पूजा करना चाहते हो। हे देव। आज्ञा है।”

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