भैरवी साधना की तांत्रिक सिद्धि

धर्मालय के प्रसार में सहयोग करें

केवल इसी स्तर पर रात्रि 9 बजे से डेढ़ बजे तक पूजित भैरवी को चक्र के मध्य बैठाकर सामान्य प्रार्थना करके मदिरा-मांस-सिन्दूर-फूल-अक्षत-बेलपत्र आदि चढ़ाकर पहले उसे फिर स्वयं उसे ग्रहण करके उसे देवी रूप ध्यान करके देखते हुए प्रतिदिन इस मंत्र का 11 माला का जाप करें।

(यहाँ एक बात जानना चाहिए। इस पूजा के बाद कई गुरु साधक की भी भैरवी द्वारा भैरव मानकर पूजा करवाते है।

दूसरी बात की वाम मार्ग के अनेक सम्प्रदाय में देवी-पूजा खा-पी कर करने के निर्देश है।)

भैरवी के सामने आसन पर बैठकर दोनों घुटनों को नग्न मिलाकर सुखासन में बैठकर, अपने-अपने घुटनों पर हाथ रखे दोनों नेत्र मिलाकर रखें। साधक पहले वाचिक, फिर मानसिक जप करें; तो 21 रात में भैरवी की  आँखों में देवी नजर आने लगती है और 108 रातों में भैरवी शक्ति साधक में समा जाती है। वह भैरवी भी देवी रूप होकर कई परा मानसिक शक्तियों की  स्वामी बन जाती है।

विशेष – यह परीक्षित प्रयोग है; पर शक्तियां कामना के अनुसार प्राप्त होती है। कामना ‘ज्ञान’ की है, तो वही शक्ति प्राप्त होगी, धन के लिए फिर सिद्धि करनी होगी, भले ही वह एक चौथाई समय में हो।

धर्मालय के प्रसार में सहयोग करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *