भैरवी पूजन विधि

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मंत्र – हंहक  लं  ह सौ हं रं वं लं रं ढ ह स ख  फ्रे ऋ  हं फट

ध्यान रूप – भैरवी में ज्योतिमर्य चांदनी सी उज्जवल तीन नेत्रों वाली(तीसरे नेत्र के भैरवी के आज्ञा चक्र पर कल्पित करना चाहिए), उन्नत पयोधरों से युक्त, यौवन से भरपूर, भरे अंगों वाली यह देवी पदमासन में बैठी हुई है(भैरवी सुखासन भी मान्य है)।

इनकी चार भुजाएं है। दायें हाथ में माला(रुद्राक्ष) और वरद मुद्रा हैं(वरदान देने की मुद्रा) बायें हाथ में पुस्तक एवं अभय मुद्रा है।

विधिवत चरणों से मस्तक तक चमेली या ओड़हुल के फूलों से मंत्र पढ़ते हुए प्रोक्षण करें। हर बार फूल को मदिरा से सिक्त करें।

(यहाँ सामान्य पूजा के नियम होते है; पर उद्देश्य भैरवी में देवी भाव का (दोनों में) स्थापन होता है।)

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