भैरवी- चक्र काम- काली विधि में भैरवी- दीक्क्षा अभिषेक [कामख्या भैरवी अभिषेक ]

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बहुत से लोग इस अति गोपनीय विद्द्या की साधना में प्रवृत होना चाहते हैं .मुझसे पूछते हैं कि कैसे  करें ? यह अन्य साधनाओं के विषय में भी एक समस्या है ..पता नहीं वे साधनाओं को क्या समझते हैं. इसी दृष्टिकोण से हमने सब विस्तार से बताने का निर्णय लिया है ,ताकि वे यह समझें  की उन्हें करना क्या है ..इसे स्त्री पुरुष कोई भी कर सकता है ,.

भैरवी का चुनाव == यह पहला काम है ,जो उन्हें करना है .इसे सुन्दर, स्वस्थ और प्रस्स्नन मुद्रा वाली होना चाहिए . गोरी हो या काली ,कोई फर्क नहीं पड़ता ,पर प्राकृतिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए .

स्थान == यदि आप जंगल में नहीं रहते , तो आपके लिए एक ही स्थान उचित है ,वह है १२ फीट चौड़ा १२ फीट लम्बा एक कमरा या इससे बड़ा .यंत्र == इसके लिए कामकला काली का सिद्ध यंत्र पृक्त किया जाता है .

मण्डल == कमरे में सिंदूर ,कुमकुम ,अष्टगंध ,धतूरे का रस एवं पंचरंगा का प्रयोग किया जाता है . यह अष्टदल कमल का  श्रीयंत्र होता है . जिसके मध्य में एक पर एक तीन भुजावों वाला अधोमुखी त्रिकोण होता है . यह काम कला काली के यंत्र की ही प्रतिकृति होती है ..

समय ===शुक्ल या कृष्ण पक्ष की पंचमी,अष्टमी , नवमी , चतुर्दशी  या जो गुरु बताये .

भैरवी की अभिषेक शुद्धि  एवं दीक्षा

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स्नान ===यह पञ्च स्नान होता है .जल ,हल्दीदूध ,कुमकुम,सरसोंतेल और अपामार्ग +मदर +धतुरा से सोधित मिटटी .. इस स्नान में मन्त्र से अभिषेक किया जाता है .

मन्त्र ==ॐ ह्रीं क्लीं भगवति महामाये अनंगवेग साहसिनी सर्वजन मनोहारिणी सर्ववशंकरी मोदये मोदये प्रमोदये प्रमोदये येह्येह्याग्च्छाग्च्छ कामकला काली सानिध्यं कुरु कुरु हूँ हूँ फट स्वाहा

श्रृगार == तलवे , पैर ,पिंडली ,हथेली,हस्त पृष्ठ , बाजू , मूलाधार , आज्ञा , सहस्त्रार चक्र पर भैरवी चक्र कुमकुम  से मन्त्र सहित  चित्रित किया जाता है .

मन्त्र ==ह्रीं क्लीं क्लीं क्लीं श्रीं श्रीं श्रीं ह्रीं फट

शक्तिपात ==यह न्यास विधि है . कई प्रकार से की जाती है . इसके द्वारा भैरवी  में कामख्या देवी को प्रतिष्ठित किया जाता है . इस क्रिया के बाद भैरवी  में कई अलौकिक शक्तियों का समावेश हो जाता है. वह देवी बन जाती है .

न्यास की प्रक्रिया इसी शीर्षक से वेवसाईट पर अन्यत्र देखें .

पूजा === इसके बाद भैरवी को चक्र में प्रवेश कराकर बैठाया जाता है और देवी की तरह पूजा की जाती है . फिर प्रति दिन उसे सामने बैठा कर मन्त्र जपा जाता है .

मन्त्र ===यह भैरवी अभिषेक सभी प्रकार की साधनाओं के लिए होता है .उसमें किसी भी देवी की स्थापना करके सिद्धि की जाती है .यहाँ हम काम कला काली की सिद्धि का वर्णन कर रहें हैं , क्योकि एक इस देवी की सिद्धि के बाद सभी की सिद्धि ऐसे सरल हो जाती है ,जैसे ट्रक चलने वाला अन्य करों या बाइक को चलाना सीखे .

क्लीं क्लीं हूँ क्रो स्फ्रें कामकला कलि स्फ्रें क्रो हूँ क्रीं क्लीं क्लीं  स्वाहा

यदि भैरवी स्वयं यह साधना कर रही है यानी अकेले तो उसे ही चक्र में बात कर  मन्त्र जप काना चाहिए . स्त्री जल्दी सफल होती है . इसके कई कारण हैं .

विशेष बातें

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१ —  कमरा न हो तो क्या करें === पूजाघर या किसी एकांत जगह पर यंत्र स्थापित करके सारी क्रियाएं संपन्न करें .

२–क्या पत्नी को भैरवी  के रूप में स्थापित किया जा सकता है ?=== यदि वह प्रसन्न मन से स्वीकारे ,तो हाँ .पर दीक्षित होना अनिवार्य है .

३ क्या बिना भैरवी के यह संभव है ?===यह भैरवी  साधना का वर्णन है .इसके बिना दूसरी विधियाँ हैं .उसमे साधक का अभिषेक करके दीक्षा दी जाती है .भारवि सादना में भी साधक की भी दीक्षा होती है .हम सब एक बार में नहीं चढ़ा सकतें हैं इसके बाद क्रम से दिया जाएगा ‘

४ –कितना मन्त्र जपना होगा ?===सभी देवियों की अलग अलग संख्या है . कामकला काली के लिए तीन लाख .तीस हजार मानसिक  हवन ..भौतिक हवन इस युग में संभव नहीं है .

५—किन किन देवियों की साधना की जा सकती है ?=== यह साधना विधि है ..इससे सभी सक्तियों की सादना की जा सकती है .केवल मन्त्र बदल जातें हैं . इससे अप्सरा,यक्षिणी ,सुन्दरी भूतनी ,पिशाचिनी से ले कर दुर्गा, लक्ष्मी, आदि हर शक्ति को ,यहाँ तक की कुण्डलिन तक की साधना की जा सकती है .

६– इसमें और दूसरी विधि में अंतर क्या है ? यह तंत्र में सबसे शक्ति शाली विधि समझी जाती है .इसकी कई गुप्त विधियों का भी प्रयोग है ,जो और शक्तिशाली हैं .पर हम उसे यहाँ नहीं दे सकते . बिना दीक्षा के बताना वर्जित है .

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3 Comments on “भैरवी- चक्र काम- काली विधि में भैरवी- दीक्क्षा अभिषेक [कामख्या भैरवी अभिषेक ]”

    1. आप हैं कौन ? साधना चाहे किसी मागॆ की हो ,एक दुगेम संकल्प होता है .बिना पूरा डिटेल जाने कुछ भी बताना सम्भव नहीं है .यह चैप्टर भैरवी मागे े सम्बन्धित है .भैरवी का.क्या डिटेल है ?

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