भैरवी का चक्र प्रवेश

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श्रृंगार के बाद भैरवी को चक्र में प्रवेश कराकर मध्य वृत्त में बैठाया जाता है। यहाँ लाल सूती आसन के प्रयोग का विधान है।प्रवेश के समय ‘ह्रीं श्रीं ह्रीं भगवती ….. मण्डले उपविश नमः’ जिस देवी के रूप में भैरवी को ईष्ट बनाया है, खाली स्थान में उसका नाम होता है।

गुरु मंत्र पढता है, चवल, जौ, फूल आगे आगे मंत्र पढ़कर बिखेरता है, भैरवी उस पर से मंडल में प्रेवश करती हैं।आसन को पहले ही उस देवी के ईष्ट मन्त्र से अभिरक्षित किया जा चूका होता है।

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