भगवानों में श्रेष्ठ कौन है ?

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आज कल कुछ लोग पूछने लगे हैं कि कौन  से भगवन श्रेष्ठ  हैं ? यह भ्रम  इसलिये उत्पन्न हुआ है कि हर सम्प्रदाय अपने अपने इष्ट को सर्व श्रेष्ठ बताते हैं .यदि कोई आप से पूछे कि आपका कौन  सा अंग श्रेष्ट है तो आप क्या जबाब देंगे ? एक कम्पुटर को देखिये . उसमें बहुत से pwaint हैं .वहाँ से अलग अलग तरह की उर्जा निकल कर अपना अपना कम करतीं हैं ? हर pwaint की अपनी शक्ति  है . इन सबकी उर्जा मिल कर जो काम  करती है उस रिजल्ट को हम कम्पुटर कहतें हैं . अब कोई पूछे  कि  इनमें श्रेष्ठ कौन  है ,तो मुश्किल हो जायगी ,एक भी न हो तो कम्पुटर काम  नहीं करेगा .

यही स्थिति है .ब्रह्माण्ड का एक पावर सर्किट है ,जो कुछ शास्वत नियमों से बनता है . उसमें अनगिनित pwaint हैं . इनका ९ pwaint मुख्य है शेष सभी इससे ही विकसित होतें हैं इन्ही में व्याप्त शक्तिओं को भगवन देवी या देवता कहा जाता है .चूँकि ब्रह्मांड की सभी इकाई ,जिसमें हम भी हैं ,ब्रह्मांड के ही सर्किट में ,उन्ही नियमों से बनता है और उसमें उसी तरह के पावर pwaint होतें है ,इसलिय सारे देवी देवता हमारे अन्दर होते हैं और उनका कनेक्सन ब्र्हमंदीय उर्जा से होता है ,इसलिए अपने मानसिक बल और विधि तक्निकिओं से  हम कोई भी pwaintविकसित करके उसे अधिक शक्तिशाली बना कर अधिक  उर्जा की प्राप्ति कर सकतें हैं . ये मानसिक भाव और बल से नियंत्रित होतीं हैं . इसिलिय गणेश जी की पूजा और ध्यान सबसे पहले निर्देशित होता है ,चाहे इष्ट कोई हो ,तांत्रिक रूद्र की और योगी आज्ञाचक्र की साधना करते हैं . ये सभी भगवन हैं . इनके बिना जीवन नहीं रह सकता इसलिय सभी श्रेष्ठ हैं .

ले किन हम देखतें है की बिजली न हो ,तो कम्पुटर के सारे  pwaint  बेकार हैं उनका कोई मतलब नहीं रहता ,क्योंकि उसका इंधन बिजली है . हमारे शरीर का या इस ब्रह्माण्ड का इंधन परम तत्व है ,जो हमारे सर के चाँद से हममें गिएता रहता है .इसे ही ॐ के चाँद में दिखाया गया है .यह हमारी खोपड़ी ही है और नाक  की सूंढ़ निकलती दिखाई गई है  इसलिय बहुत से प्राचीन ऋषी सीधे उस परमात्मा पर ध्यान  केन्द्रित करने को सर्वोत्तम मानते रहें हैं .यह है भी पर शून्य  समाधी एक डीफिकाल्ट टास्क है .इसलिय भावरूप बना कर किसी शक्ति को साधित करने के रास्ते भी सामने आये . पर याद कीजिय गीता . श्री कृष्ण ने कहा कि  तुम किसी भाव की साधना करोगे ,अन्तत मेरी ही यानी तत्व की ही साधना करोगे ,क्योंकि किसी की भी शक्ति प्रदान करने वाला तो वह  ही  है.

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