बारह भाव में मंगल के फल एवं टोटके.

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नवम भाव

इस भाव का मंगल शुभ मन जाता है. जातक हो या जातिका , उनका पैतृक आधार प्रतिष्ठित और मजबूत होता है. वे खानदानी स्तर पर ही गर्वीले होते हैं और स्वयं शेर के स्वभाव जैसे होते हैं. इनमें खानदानी गर्व का भाव कुछ ज्यादा ही होता है. ये अक्सर दो या तीन भाई होते हैं. अकेला हो तो इलाके में अपनी वीरता और न्यायप्रियता के लिए प्रसिद्द होते हैं. एक से अधिक भाई हो, तो साथ रहना उन्नति के लिए आवश्यक होता है, वर्ना भाई ही भाई का बेर गर्क करता है.

इसकी माता और पत्नी भी सुन्दर और नेक होती है. दोनों सुक्गी भी रहते हैं; जब तक बुध वृहस्पति या किसी पापी के साथ न हो जाए .पता ख्याति, राज सम्बन्ध अच्छे होते हैं. पैत्रिक सम्पत्ति जैसी भी मिले उन्नति होती है.कुंडली में 9 वें खाने का मंगल धन, स्त्री और सन्तान के सम्बन्ध में अच्छा फल देता है. जब भी बड़े भाई या ताऊ का सम्बन्ध हो, मंगल की वस्तुओं से सम्बन्ध हो, लाभ होता है.

यद्दपि चंद्रमा और सूर्य इस जातक जातिका की कुंडली में अच्छे ही होते हैं; फिर भी माता पिता की हालत का ज्ञान चंद्रमा और गुरु की दशा पर निर्हर करता है. 28 वर्ष की उम्र से अपनी जिन्दगी स्वयं के उपार्जन पर रजा की तरह चलेगी .

यदि मंगल को सूर्य चंद्रमा और गुरु की सहायता नहीं मिल रही हो और बुध भी खराब हो रहा हो, तो मंगल बाद होगा और भाई से झगडा , भटकना, घर से बेघर , शेर होते हुए भी गीदड़ से मांग कर खाने की नौबत आ जायगी.

उपाय-

  1. मूंगा ताम्बा या मूंगा सोना दाहिने हाथ की सूर्य की ऊँगली में पहनें .
  2. बुध का उपाय उसके खाना के अनुसार करें.
  3. चांदी, बेलपत्र, शिवलिंग पर जल अर्पण आदि को स्थापित करें.
  4. घर में चांदी के बर्तन में शहद स्थापित करें.
  5. सूर्य को अर्ध्य दें.
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