बारह भाव में अशुभ गुरु के फल उपाय एवं टोटके

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वृहस्पति को सभी ग्रहों का मुखिया कहा जाता है. यह प्राण वायु और प्राण उर्जा की आपूर्ति करता है. इसी लिए इसकी शक्ति से ही सभी शक्तिवान होतें हैं. मानव शरीर में इसका स्थान आज्ञाचक्र है. यहीं से यह सर के चाँद को भी नियंत्रित करता है. ज्योतिष में इसे गुरु , अघोर तंत्र में इसे हाकिनी और शैव मार्ग में रूद्र कहा जाता है. यह परम्परागत संस्कार के विवेक का अनुसरण करता है. बुद्ध और शुक्र इसे प्रदूषित करतें हैं, चंद्रमा शीतल और स्वच्छ . कुंडली में जैसा शनि होता है, उसका प्रभाव इस पर वैसा ही पड़ता है.

पितृदोष

लाल किताब वाले इसे पितृ ऋण कहते हैं. प्रवृतिपरक और वस्तुपरक होने के कारण परम्परागत और लाल किताब ज्योतिष की गणना में अंतर भी है. परम्परागत ज्योतिष में किसी कारणवश वृहस्पति खराब हो रहा हो, तो वह पित्री दोष माना जाता है. लाल किताब में जब वृहस्पति के खाने में बुद्ध, शुक्र, राहू या केतु बतौर पापी हों और यह दो खानों में हो, तो पितृ ऋण माना जाता है. दोनों का मानना है कि इस दशा में कुंडली के सारे फल खराब हो जातें हैं.

पितृ ऋण के उपाय

इसके लिए लोग पूजा पाठ करवातें हैं, पर आज के युग में वह सफल होता नहीं दिखता . लाल किताब तो अलिफ़्लैला की कहानी के उपाय बताता है, जो आज के युग में संभव ही नहीं.इसका सीधा अर्थ समझना चाहिए, इसका अर्थ प्राण उर्जा का प्रदूषित हो जाना है. यह अक्सर पैत्रिक होता है. बुद्ध और राहू को शुद्ध करना सबसे अच्छा उपाय है. अपामार्ग , नीम, मदार , कुश , गूलर और आम की समिधा में हर महीने की पूर्णिमा को हवंन करवाते रहना और घर के सभी सदस्यों का घर में रहना सबसे उत्तम है.

प्रथम भाव वृहस्पति के फल उपाय एवं टोटके

यह जातक अत्यधिक स्वाभिमानी और दबंग होता है. मंगल सूर्य का उत्तम प्रभाव हो, तो घमंडी और आक्रामक होता है. अक्सर यह सेना, पुलिस या किसी समकक्ष विभाग में होता है. ये दोनों खराब हो रहें हों, तो अपराधी होता है. जातक मंगली हो, तो क्रूर होता है. तब तो राज्य की प्रोसिडिंग में भी अड़ता है, जब राहू सूर्य को बर्बाद कर रहा हो . शनि भी इस दशा में खराब हो, तो जेल जाना पड़ता है. यह शुक्र के प्रभाव में हो, तो जिन्दगी के मामले कठिन हो जातें हैं. शरीर, स्त्री , संचित धन, खेत आदि परेशानी के कारण बन जातें हैं.

सूर्य अच्छा हो, तो राज्याधिकारी होता है. इसके साथ खाना 10 में मंगल हो, तो सेना या पुलिस का अधिकारी होता है. कुंडली में शनि अच्छा हो औरुसे सूर्य का सपोर्ट मिल रहा हो, तो न्याय के क्षेत्र में प्रतिष्ठित होता है. शनि का उत्तम समर्थन से जातक शिव का त्रिशूल होता है. इससे किसी प्रकार उलझना किसी के लिए भी भारी पद सकता है. ऐसा जातक अक्सर बड़े स्तर का विशाल दायरा रखने वाला होता है. दौलत का फैसला शनि की स्थिति पर होगा.यह कई देवी प्रदत्त गुणों का मालिक होगा , यदि केतु अच्छा हो. चंद्रमा अच्छा हो, तो उम्र के साथ सुख बढेगा .

2 ,5 ,9 ,11 , 12 और इसके साथ इसके दुश्मन हों, तो फल उसके अनुसार बर्बाद होगा. दो या दो से अधिक में हों, तो पित्री ऋण होगा.7 का खाली रहना धन, स्त्री, खेत और शुक्र से सम्बंधित सभी मामलों के लिए अच्छा होता है.मंगल 7 से वह किसी बड़े खानदान से सम्बंधित होगा या उसका पुरोहित होगा. .

देवता गणेश जी , धातु सोना, रत्न पुखराज . दुश्मन की बर्बादी को, दुश्मन के अनुसार दूर करें . पीपल में पानी देना और मंदिर, साधू संत, पिता, बुजुर्गों के आशीर्वाद से किस्मत चमकेगी.

दूसरे भाव वृहस्पति के फल उपाय एवं टोटके

यह आज्ञा चक्र है . वृहस्पति का अपना घर. यहाँ से शरीर में हर क्रिया का नियंत्रण होता है. यह जातक अपने क्षेत्र का गुरु यानी निर्देशक होता है. यदि इसका प्रभाव शुक्र पर हो, तो औरतों का गुरु होता है. अब 2 और 8 के दुश्मन ग्रहों का भी प्रभाव इसके जाती फल पर नहीं पड़ेगा. खैरात और यात्री सेवा से धन बढेगा .खर्चीला होगा. शुक्र या केतु राहू के प्रभाव में हो , तो कर्ज से परेशान रहेगा. मंगल 8 हो और 9 में कोई शत्रु न हो, तो राज सम्बह्ध अच्छे होंगे और हर शै मदद पर होंगा . मंगल 9 से हुकूमत का व्यक्तित्व होता है. शनि 8 से सन्यासी मन होता है. र्राहू ८ से सोचने की क्षमता शक्तिशाली होगी. केतु ८ से नेक और इमानदार होगा. केतु 9 से घूमने वाले कामों यमें उच्च स्तर होगा .केतु 6 हो, तो अपनी मौत को पहले जान लेगा. जब 2 , 5 ,8 , १०, 12 उत्तम हो, तो लाटरी या या वसीयत से धन की प्राप्ति होती है. धन दौलत से सुखी होगा. गैबी मदद मिलती रहेगी .जब शनि 12 हो, तो बहुत बहादुर और योद्धा होगा. राहू अच्छा हो, तो मान सम्मान का मालिक होगा.

2 और 8 मंदा हूँ, तो अपने ही कान्दान को बर्बाद करने वाला होगा.8 का मंदा असर कुत्ता, वाहन, पैर, प्रगति, पर पहले प्रगत होगा. पुत्र पर भी. शनि दो हो , तो ससुराल नष्ट होगा. 8 और २ में मंदा गृह हो, तो यह व्यक्ति जहां जाएगा , बर्बादी साथ जायेगी. औरत मंदी हालत में होगी, शुक्र यानी धातु खराब होगा , रात की नींद जायेगी, जब शुक्र मंदा और शनि 10 में हो शनि 10 , बुध 8 धन हानि और कैद तक हो सकती है, इस दशा में बुद्ध 9 हो, तो इर्ष्या से जलने वाला होगा.

शुक्र के लिए चन्द्र का, बुद्ध राहू के ल्लिये शनि का, शनि के लिए वृहस्पति का उपाय होगा. सब के लिए खाना 7 में दिए उनका उपाय देखें. देवता गणेश, हैं.

तीसरे भाव वृहस्पति के फल उपाय एवं टोटके

जब तक बुद्ध और मंगल अच्छे होंगे यह जातक त्रिलोकी को वश में करने वाला और प्रतिष्ठित होगा. दुर्गा पूजा से बढ़ता है और अपनी खुशामद पर नष्ट होता है. दोस्तों का दायरा बड़ा होता है, पर खून के सम्बन्ध, ससुराल आदि से धोखा होता है. औलाद के जन्म से उत्तम असर होगा , जब 9 में कोई ग्रह हो. शनि 8 में हो, तोधन, उम्र दोनों उत्तम होंगे.2 में हो, तो चालाक होगा. धन शनि पर और ख्याति बुद्ध पर निर्भर करेगी. खाना 7 खाना 9 खाली हो या वृहस्पति के घरों में दुश्मन हों, तो मंद भाग्य और डरपोक होगा. चंद्रमा १२ ओ, तो अपनी खुशामद से नष्ट होगा. बुद्ध 3, मंगल बाद हो, तो अपनी तारीफ़ करने वाला बकवादी, दूसरो को अपनी वाणी से जलाने वाला और खुद को बर्बाद करने वाला होगा .शनि 4 और बुद्ध मंदा हो, तो सबको लूट ठग कर धनि बन जाएगा, पर सुख नसीब नहीं होगा.

दुर्गा देवी और मूंगा रत्न है है. कलाई में ताम्बे के कड़े पर सोना ताका लगा कर पह्नेब . अपामार्ग का हवं करें.

चौथे भाव वृहस्पति के फल उपाय एवं टोटके

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