पितृ दोष का निवारण कैसे किया जाए ?

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इसके दो उपाय है – पितृ दोष में बृहस्पति खराब होता है क्योंकि बृहस्पति के खाने में पापी ग्रह बैठ जाते है।इसका अर्थ यह होता है कि पितरों ने (सात पीढ़ी तक) कोई ऐसा काम किया है जिसका दंड उनकी संतानों को भुगतना पड़ रहा है। इस अवस्था में पितृ भी कष्ट में होते है ।और जिस जातक के कुंडली में पितृ दोष होता है उसके सभी ग्रह चाहे कितने भी अच्छे हो निष्फल होते है।ऐसे जातक को किसी काम सफलता नहीं मिलती और अपयश भी हाथ आता है।

उसे सांस की बिमारी भी हो सकती है।और संतान हीनता से भी पाला पड़ सकता है।इस दशा में एक उपाय तो पितरों की शान्ति के लिए यज्ञ कराना है । लाल किताब के अनुसार अपने रक्त के सभी सम्बन्धियों से धन लेकर । परम्परागत ज्योतिष में अपनी आस्था के अनुरूप अलग-अलग उपाय बताये गये है। लेकिन तन्त्र विद्या के अनुसार इसका निदान कुंडली की गणना करके किया जाता है। यह देखा जाता है कि वह पितृ दोष किस प्रकार का है और इसके बाद उसका निदान किया जाता है। यह निदान भी दो प्रकार का होता है एक पितृ दोष बनाने वाले ग्रहों के तांत्रिक टोटकों के हिसाब से एक तन्त्र क्रिया के हिसाब से।

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