न्यास विधि

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सबसे पहले अंग न्यास किया जाता है। न्यास की कई प्रक्रियाएं वाममार्ग एवं वैदिक मार्ग में प्रचलित रही है। षडंग न्यास , मालिनी न्यास, मातृका न्यास, षोडा न्यास आदि। पूजा में छै अंगों का न्यास सिर, मुख, ह्रदय, नाभि,कमर और पैर में किया जाता है। मातृका न्यास में शरीर के 50 या 52 मातृका पीठों का न्यास किया जाता है। यह बहुत गुप्त और विस्तृत न्यास है। यहाँ हम एक सरल न्यास दे रहे है। भैरवी साधना में न्यास भी अपनी-अपनी विधि प्रक्रियाओं से किया जाता है।

गुरु भेद से इसमें अंतर हो जाता है। न्यास की शास्त्रीय परम्परायें अत्यंत जटिल है।

सरल प्रक्रिया यह है कि हाथ में मदिरा लेकर शिव् मन्त्र ‘ॐ नमः शिवाय’ से तीन बार सिर एक चाँद पर डाले। तीन बार मुख के दोनों बगल, मुख में ‘ॐ हौ श्रीं श्रीं वागेंश्वरी नमः’ से मदिरा प्रोक्षित करना चाहिए। फिर कंठ में ‘ श्रीं ह्रीं स्त्रीं हूं फट’ से, ह्रदय में ‘ आं ह्रीं क्रों’ से , नाभि में ‘ऐ श्रीं ह्रीं क्लीं’ से , मूलधार में ‘क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं फट स्वाहा से, जंघाओं में ।

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