धर्मालय नौटंकी बाबा का आश्रम नहीं है।

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कुछ लोग बार-बार नए अकाउंट क्रिएट करके लकड़बघ्घों की तरह ‘धर्मालय’ से कुछ सिद्धि-साधना झटक लेने के लिए वेश बदल-बदल कर आ जाते है। उनकी भाषा , स्टाइल, बदले नाम आदि बता देते है कि वे कौन हैं। जब उनका स्वार्थ सिद्ध नहीं होता, तो शिष्टाचार त्याग कर अमर्यादित आलोचना करने लगते है।

ऐसे सभी लोगों और उनसे जो किसी सिद्धि-ज्ञान – भक्ति आदि को नटकिया वेशभूषा और भांगड़ा डांस , नागिन डांस , गोल्डन डांस, खोपड़ी-हड्डी आदि से सम्बन्धित समझते है; धर्मालय दर्जनों बार निवेदन कर चुका है कि वे ‘धर्मालय’ छोड़ दें। यह किसी नौटंकी बाबा का मंच नहीं है। ऐसे नाच और वेशभूषा पचास वर्ष पहले गाँवों –कस्बों में ‘लौंडे का डांस’ के नाम से जाना जाता था। हड्डी-खोपड़ी – जटा-भभूत का भी तन्त्र विद्या से कोई सम्बन्ध नहीं है। सिनेमा-सीरियल की दुनिया नहीं है यह। इस सबके आध्यात्मिक तन्त्र रहस्य है और जो मूर्ख इन्हें  नहीं जानता; वह कौन सा तांत्रिक-मान्त्रिक है भाई?

आपका आरोप है कि मैं बेहद रफ़ आदमी हूँ। हां हूँ। चोर को चोर , मूर्ख को मूर्ख और पाखंडी को पाखंडी ही कहा जाता है। मैं सनातन धर्म और तन्त्र के उन वैज्ञानिक रहस्यों को व्यक्त कर रहा हूँ, जो नियम – सूत्र- ज्ञान-विज्ञान के रूप में है। तन्त्र विद्या और सनातन धर्म के उन गोपनीय रहस्यों को सार्वजनिक कर रहा हूँ, जो सभी संत-महात्मा,  धार्मिक या आध्यात्मिक जिज्ञासुओं , उच्चकोटि के वास्तविक साधकों का दिशा निर्देश करने वाले है और  प्रमाणिक हैं। जो प्रयोग करेगा, स्वयं समझ जाएगा और मेरी पुस्तकों को पढ़कर जाने कितने साधकों ने अपनी साधनाओं को सुधारकर मुझेसाधुवाद भेजा है और भेजते रहते है।

यदि आप इन अनमोल गुप्त रहस्यों का मूल्य नहीं समझते , चिकित्सा-ज्योतिष-वास्तु के सूत्र –नियमों को जानकर लाभ नहीं उठा सकते , जय गुरु-जय गुरु कहके नाचने की प्रवृत्ति है; तो धर्मालय आपके लिए नहीं है। न तो मुझे जगदगुरु बनने की कोई इच्छा है, न ही मैं अपने शिष्यों की फ़ौज बनाकर कोई अपना सम्प्रदाय चलाना चाहता हूँ। मैं इस रहस्यमय जगत के समस्त रहस्यों का वैज्ञानिक रूप आधुनिक स्वरुप में समझा रहा हूँ;ताकि जन-सामान्य , पढ़े –लिखें स्त्री-पुरुष , हमारी युवा पीढ़ी जो आधुनिक विज्ञान और तकनीकी की जानकार है या वास्तविक धर्म – जिज्ञासु और विभिन्न साधनाओं में लगे साधक- गहराई से लाभ उठा सके। मेरा मानना है कि सनातन धर्म और तन्त्र विज्ञान या तन्त्र विद्या की प्रतिष्ठा इसी प्रकार हो सकती है। यही करने का निर्देश मुझे सदाशिव से प्राप्त हुआ है। इसी से देश के उच्च तकनीकी और पॉवर साइंस का ज्ञान हो सकता है।

जहाँ तक धर्मालय की सेवाओं का प्रश्न है; इसकी समस्त जनपयोगी जानकारियाँ वेबसाइट पर उपलब्ध है । यहाँ सभी विशिष्ट और सामान्य रूप से परेशान करने वाले रोगों की चिकित्सा सार्वजानिक है। जिनकी चिकित्सा केवल तंत्र विधि के नुस्खों से ही सम्भव है। अब आप कुछ करियेगा नहीं और हमसे चाहियेगा, तो हम दवा नहीं बनाते भाई। तन्त्र की कुछ गुप्त चिकित्सा विधि की दवाओं अक ज्ञान हमने नहीं दिया है, क्योंकि यह खतरनाक है, पर सरल विधियां और नुस्खें हमारी वेबसाइट पर है। आप हमसे कहेंगे कि औषधि बनवा दीजिये, तो व्यय करना होगा। हम साधना सिखायेंगे, तो व्यय करना होगा , आप सभी कुछ पढ़कर स्वयं कर लीजिये । एक भी रुपया खर्च नहीं होगा। पर कोई खाना बनाकर , आपको निःशुल्क खिला दे, न करें, तो भौंकने लगिएगा? यह प्रवृति है, तो यहाँ क्यों?

तन्त्र की बहुत सी चिकित्सा विधियां और औषधियां अत्यन्त चमत्कारी और दांतों तले उंगली दबाने की हदतक आश्चर्यजनक है। पर ये आपको बताये नहीं जा सकते। इनका दुरूपयोग हो सकता है। इसलिए मानसिक क्लेश, मिर्गी, हिस्टीरिया, भूत-प्रेत प्रकोप, राक्षस –पितर – जिन्न, ब्रह्म राक्षस आदि के प्रकोपों की चिकित्सा ऑनलाइन नहीं हो सकती। आपको मेरे पास आना पड़ेगा। कोई भी किये-कराये से सम्बन्धित विषय भी ऐसा ही है। आपको मिलना होगा और जब मिलेंगे, तो रेल भाड़ा , निवास , भोजन , अनुष्ठान आदि का व्यय होगा। कोई कहे कि वह गरीबदीन है , तो मैं आपका शुल्क छोड़ सकता हूँ , जबकि यह थोडा कठिन होता है , क्योंकि आश्रम सहित अपने सभी व्यय के लिए हमें काम करना होता है। यदि सात दिन का कोर्स है, तो मेरी स्थिति हस्याप्रद हो जाती है। फिर भी कोई लाचार है, तो मैं निःशुल्क चिकित्सा कर दूंगा। परन्तु रेल, निवास, होटल, आनुष्ठान सामग्री बेचने वाले , मजदूर आदि पर मेरा कोई वश नहीं है। आपको करना होगा। यह कम से कम में हो जाए, इसमें मैं कुछ सहायता कर सकता हूँ , पर सब कुछ निःशुल्क हो जाए, यह मेरे वश का रोग नहीं है। मैं धर्माश्रम नहीं चलाता। मुझे दान नहीं मिलता।

जो केवल बता देने से काम चलता है, प्रत्येक को बताया जाता है। तत्काल राहत के उपाय बताये जाते है, पर पांच साल से रोग है और उपाय पूछ रहे है ? उपाय से ठीक होने वाला होता, तो पांच साल न रहता। हर व्यक्ति मेडिकल – ओझा – तांत्रिक ज्योतिषी के यहाँ घूमता है। तो ठीक क्यों न हो गये? हमारे पास क्यों?

कोई वशीकरण , कोई सिद्धि , कोई यक्षिणी , कोई अप्सरा का आकांक्षी है। कोई लाइलाज , गंभीर रोग या समस्या का उपाय पूछता है। बता दूं, तो क्या कर लेंगे? और यदि इसमें नादानी हो गयी , तो प्रतिरोधी शक्तियों के प्रकोप से कैसे बचेंगे? …. तो आप ही निःशुल्क कर दीजिये। धर्म कार्य है।… क्षमा कीजियेगा, यह मेरी हैसियत नहीं है।

अब रह गयी बात कि स्वार्थ सिद्ध न हुआ, तो आप मुझे पाखंडी कहकर एंटी वायरल प्रचार करेंगे। आप समझते है कि इससे मुझे ब्लैकमेल कर सकते है। मैं इसका महत्व देता तो अपने को ऐसी ऐसी वस्तुओं से सजाकर ऐसे-ऐसे तांत्रिक भैरव तांडव और श्री कृष्ण रास के नाच दिखा रहा होता , जिनके चमत्कार लोगों को हतप्रद कर देते है। इन नौ महीने में वायरल हो गया रहता। मैं बार बार कह रहा हूँ कि मैं उन लोगों नें से हूँ, जो ख्याति , प्रतिष्ठा, धन, व्यक्तित्व सबको अपनी आत्मा की आवाज के मुकाबले ठेंगे पर रखता है । पत्रकारिता भी मैं इसी प्रवृति में करता रहा हूँ या करता हूँ। विश्वास न हो तो  www.blackdemocracy.com खोलकर पढ़िए। समझ में आ जाएगा कि  एक ऐसा संत सामने आ गया है, जो इन किसी बन्धनों से बाधित नहीं है। आप चाहे उछले या कूदे या गलियां दे – मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।मेरा रूद्र जागा, तो आप लाख पर्दों में छुपे हो; खतरे में पड़ सकते है।

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12 Comments on “धर्मालय नौटंकी बाबा का आश्रम नहीं है।”

  1. jai shri ram guru ji aap ne bahut achi bat likhi h or jo aap gupt rhisy ko bta rhe h is ke liye koti koti dhany wad ram ji aap ko dirgh aayu de.. jai shri ram

  2. यह जमाना केवल स्वार्थपूर्ति तक ही सिमित रह गया है गुरुमहाराज। कोई नैतिकता या प्रेमभाव विरल ही देखने को मिलता है। सादर प्रणाम

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