दैवी शक्तिओं और भाग्य के लिए पिरामिडों का प्रयोग

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वास्तु के हिसाब से घर  का पूरा माप बना कर ,विभिन्न प्रकार के पिरामिडों के द्वारा भाग्य के ९० प्रतिशत दोषों को मिटाया जा सकता है . इसमें मकान मालिक की कुंडली की गणना भी आवश्यक है और यदि वास्तु के हिसाब से कोई स्थूल परिवर्तन आवश्यक है ,तो सरल रूप में वह  भी करना आवश्यक होता है . बिना कोई साधना सिद्धि किये देवी देवता की कृपा प्राप्त करने का इससे सरल मार्ग कोई नहीं है .

  यह साधारण सा विज्ञानं है . पृथ्वी  से निकलनेवाली उर्जा तरंगों को आपनी जरूरत के अनुसार दूसरी प्रकार की तरंगों में बदल देना और उसका पावर  बढ़ा देना . मंदिरों का निर्माण इसी सूत्र पर किया जाता है. प्रतेक स्थान पर पृथ्वी की तरंगो में भूमि के मैग्नेटिक फिल्ड के कारण अंतर होता है और प्रत्येक धातु एवं पत्थरों में अपने अनुरूप उनको बदल देने की क्षमता होती है .इसमें   गणना करने वाले को तत्व विज्ञानं का गहरा ज्ञान होना चाहिय .वर्ना हानि भी हो सकती है .

  पृथ्वी की तरंगों को  किसी विशेष रूप में पिरामिड के शंकु पर संन्घनित करने से उसके उपर उसका पोजिटिव बनने और पिरामिड पर गिरने लगता है. इसी सूत्र  पर हमारे शरीर में सोमरस रुपी अमृत गिरता है जो देवता पीते        हैं और हमारा जीवन है .यही सूत्र  प्रत्येक इकाई को जीवित और क्रियाशील रखे हुए है इस विधि से मनमानी शक्तियों को असीमित स्वरुप में प्राप्त किया जा सकता है ,पर उसमें थोड़ी जटिलता होती है .

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