देवदर्शन दीप तेल

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काले धतूरे के फूल, खुरासानी अजवाईन, भांग, पोस्त के ढोढ़े, अपामार्ग, सौंफ – बराबर मात्र में लेकर कूट लें।इसके बराबर अंकोल के बीज कूट लें। इसमें सिलेटी रंग वाले गोबर छत्ते के रस डालकर भिंगोकर छाया में सुखा लें।

इस चूर्ण को 2 गुना तिल-जैतून का तेल बराबर मिलाकर उसमे मिलाकर डाल दें और सूखने दें। जब यह तेल पी जाए; तो कांसे की थाली को तिरछा कर लें। उसमे फैला कर धुप में रखें और नीचे भी एक थाली रखें।

नीचे की थाली में जमा तेल बोतल में बंद कर के रख लें।

यह दिव्य तेल है। कपास की बत्ती इसमें जलाकर वहाँ बैठकर ध्यान लगाकर मात्र जपने से, मंत्र तीन दिन में मन्त्र के ईष्ट देव के दर्शन होते हैं।(बिना गुरु के इस तेल को बनाना या प्रयुक्त करना खतरनाक हो सकता है; क्योंकि प्रक्रिया और मात्रा का निर्धारण, समय काल का निर्धारण ईष्ट के अनुसार होता है।)

इस तेल से बना काजल आँखों के नीचे और पलकों पर औजने से सभी प्रकार के नेत्र रोग दूर होते हैं और सपने में दिव्य शक्तियों एवं गुप्त बातो का ज्ञान होता है।
(यह गुप्त प्राचीन तंत्र नुस्खा है। बिना जानकार की सहायता के ना करें। )

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