दिव्यदृष्टि

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मंत्र – ॐ ब्रह्मदेव दिव्यशक्ति दिव्य-दृष्टि देव।

सिद्धि – यह मंत्र ब्रह्ममुहूर्त में त्राटक का ध्यान लगाकर सिद्ध किया जाता है। इसके लिए पदमासन या सुखासन में बैठ जाए। अपनी नाक की नोक को ध्यान से देखें। इससे त्राटक बिंदु पर जोड़ पड़ता है और आखें बंद होने लगती है। इस स्थिति में ही ब्रह्मा की मूर्ति का ध्यान करें। कल्पना में यह मूर्ति ज्योतिर्मय होनी चाहिए। जब आँखों के अँधेरे पटल पर यह मूर्ति प्रकट हो, तो उसे स्थिर करें। यह कभी प्रकट होती है, कभी गायब हो जाती है।

लगातार अभ्यास से ब्रह्मा की ज्योतिर्मयी मूर्ति स्थिर होकर जगमग्नाए लगती है।अब आप कल्पना करें कि यह मूर्ति विशाल होती जा रही है। जब आँखों के पटल पर केवल ज्योतिर्मय पर्दा बन जाए; तो पुनः उसमें ब्रह्मा की उससे भी ज्योतिर्मय मूर्ति ध्यानस्थ करें। पहले की तरह दुहराएं। इस तरह करते रहें। जब सातवीं मूर्ति प्रकट हो; तो मन में नमस्कार कर उनसे दिव्यशक्ति और दिव्यदृष्टि का वर मांगे।। अब देखेंगे कि वह मूर्ति सजीव होकर आपको वर दे रही है। उन्हें नमस्कार करें और साधना समाप्त कर दें।

जो साधक पूर्व में त्राटक का अभ्यास किये हुए है; उनके लिए यह साधना आसान अन्यथा यह मन्त्र 108 बार प्रतिदिन जाप करते हुए साधना करने पर 405 दिन में सिद्ध होगा। हो सकता है कि कुछ पहले भी हो जाए। यह भी हो सकता है कि और देर लगे।

अनुष्ठान – जिस स्थान के अंदर का हाल जाननाचाहते है; उसको रेखांकित करें। उसका कूर्मचक्र बनाएं। कूर्म के सिर के स्थान पर बैठकर आम, गूलर, चिडचिडा, बेल, एवं अकवन की लकड़ी मंगाएं। इससे एक हवनकुंड बनाकर गाय के गोबर के कंडे पर गाय का घी डालकर अग्नि प्रज्ज्वलित करें। इस अग्नि में धुप, तिल, जौ, बिना उबाला चावल (कच्चा चावल, अखा) गाय का घृत, मधु, दही का मिश्रण बनाकर थोड़ा-थोड़ा करके हवन कुंड में डालते हुए ब्रह्मा का ध्यान करके मन्त्र जाप करें। इस हवन को 1000 बार मन्त्र पाठ करते हुए पूर्ण करें। इसके बाद ब्रह्मा को प्रणाम करके ध्यान भूमि के अंदर की ओर केन्द्रित करें। सब कुछ स्पष्ट दिखलाई देगा।

 

विशेष –

  • इस सिद्धि से ध्यानस्थ होने पर भूत, भविष्य, सुदूर घटित होने वाली घटनाओं को भी प्रत्यक्ष किया जा सकता है।
  • त्राटक की यह साधना जो भी साधक लगातार करता है, वह अपनी दृष्टि के प्रभाव विध्वंस कर सकता है, विस्फोट कर सकता है, कल्याण भी करा जा सकता है।
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2 Comments on “दिव्यदृष्टि”

  1. मदर को आक , अक्वन , आखा इत्यादिउ कहा जाता हैं , इसका दूध आँख में पड़ने से आँख खराब हो जाता हैं . इसकी झाड जगह जगह पायी जाती हैं और इसमें केवल सफ़ेद एवं लाल फोलोलों वाले झाड़ों के पौधे हवन एवं अन्य कार्यों में प्रयुक्त होते हैं. इसका एक थोड़ा छोटा स्वरुप होता हैं . जिसके फूल लाल और ऑरेंज टाइप के फूल होते हैं | पत्ते छोटे और अपेक्षाकृत पीले होते हैं . ये किसी काम में नहीं आता| इसी झाड की सूखिऊ लकड़ी या कच्ची लड़की अकवन की लकड़ी कही जाती है

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