त्रिपुर भैरवी रहस्य

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अपनी चुनी हुई ‘भैरवी’ को  तंत्राचार्यों ने ‘दूती’ कहा है यानी मध्यम। इसे ‘भैरवी’ भैरव जी की शक्तिरूपा पत्नी के रूप में कहा जाता है, जो इसमें आवाहन करके प्रतिष्ठित की जाती है।इसमें और ‘त्रिपुर भैरवी’ में क्या अन्तर है?इसे समझना होगा। भैरव जी महाकाल के ही एक रूप है। प्रकृति का या हमारा जो पॉवर-सर्किट बनता है।

उसमें तीन प्रमुख ऊर्जा बिंदु होते है। एक धन पोल पर, एक ऋण पोल पर, एक नाभिक। इसमें तीन प्रकार की शक्तियां निवास करती है, जो तीन देवियों , त्रिशक्ति, त्रिपुर, आदि के नाम से जानी जाती है। ‘त्रिपुर’ का अर्थ है तीन पुर अर्थात तीन लोक है। इन तीनों लोकों एवं अपने तीन मुखों को धारण करने वाली यह देवी इस पूरे सर्किट की देवी है। यानी महाकाल की शक्ति। महाकल को ही काल भैरव भी कहा जाता है।

भैरवी इस त्रिपुर भैरवी में विकसित पॉवर-पॉइंट की शक्तियां है। भैरव मार्ग के साधक इन पॉवर-पॉइंटो को ही भैरव मानते है और इनकी शक्तियों को ‘भैरवी’; क्योंकि प्रत्येक पॉवर-पॉइंट की संरचना वही होती है; जो पूरे  इकाई की यानी शिवलिंगाकृति या भैरवी चक्र की आकृति। यानि ये महाकाल या काल भैरव का ही अस्तित्त्व होता है। इन मुख्य तीन रूपों में (+,-,न्यूट्रल) तीन शक्ति निवास करती है। इन तीन भैरवियों को मार्ग भेद से कई नामों से जाना जाता है। नाम से कोई फर्क नहीं पड़ता; गुणों एवं भाव के वर्णन सबके एक से हैं। सामान्य प्रचलित नामों के आधार पर जानें, तो ऊपर पार्वती, मध्य में भुवनेश्वरी, और नीचे कामेश्वरी या काली होती है।

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