तीन देवियों, त्रिशक्ति, अर्द्धनारीश्वर की उपत्ति

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इस डमरू की प्रत्येक धारा में तीन मुख्या धाराओं का समिश्रण होता है। इस की धूरी पर भी एक केंद्र में एक धनध्रुव (+ पोल ) पर एवं एक ऋणध्रुव (- पोल ) पर तीन ऊर्जा बिन्दुओं की उत्पत्ति होती है। यहाँ से तीन प्रकार की ऊर्जा निकलती है।

ये ही तामसी (काली ), राजसी (कामेश्वरी ), सात्त्विक (तारा/पार्वती ) के नाम से जानी जाती है। इस डमरू को अर्द्धनारीश्वर कहा जाता है , क्योंकि इसका आधा भाग + और – भाग धाराओं से बना होता है।

वैदिक ऋषियों ने इन तीन ऊर्जाबिन्दुओं संरचना को ‘वामनावतार ’ कहा है और तीनो बिन्दुओं को धरती (आधार ), सूर्य (नाभिक ) और आकाश (+) की उत्पत्ति कहा है। ये ही तीन मुख्या शिवलिंग है; क्योंकि इनकी संरचना शिवलिंग (शिवालयों के ) जैसी होती है।

इन ऊर्जा तरंगों में एक चाँदनी के रंग की , एक ख़ूनी लाल और बीच वाली सुनहले रंग की होती है। ये ही तीन मुखवाले शिव है। यह भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र है , जिससे सृष्टि उत्पन्न होती है।

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One Comment on “तीन देवियों, त्रिशक्ति, अर्द्धनारीश्वर की उपत्ति”

  1. aap nea visay achcha rakha ,,,,, varanasi jyotish aap kea grup ka samman karta hia,… [ awdhut umesh ] kashi . varanasi.

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