तांत्रिक सिद्धि साधनाओं की प्राप्ति कैसे करें ?

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तन्त्र विद्या में आधार शक्ति अपना शरीर और मानसिक शक्ति होती है। इसके अतिरिक्त इसे सीखने वाले (स्त्री – पुरुष) की प्रबल जिज्ञासा आवश्यक होती है । इन तीनों में से किसी का भी अभाव हुआ; तो तंत्र विद्या की कोई बात जरूरत के लायक नहीं हुई , तो सिद्धि नहीं मिलती, चाहे वह किसी भी प्रकार की हो।

अपना शरीर

  • शरीर सामान्यतया स्वस्थ होना चाहिए। विशेषकर कब्ज, प्रमेह (बहुमूत्र , स्वप्न दोष , लिकोरिया , सोम रोग आदि) और मानसिक तनाव न हो, इसका ध्यान रखना चहिये। शरीर शुद्ध और मन को प्रसन्न रखने की आवश्यकता होती है । यह स्वयं के करने योग्य है।
  • शरीर की ऊर्जात्मक शक्ति को शुद्ध करना तन्त्र में भूत शुद्धि कहलाता है। यह गुरु दीक्षा के समय गुरु द्वारा तीन बार किया जाता है , इसके बाद इसे स्वयं अभ्यासित करना पड़ता है । पूजा –साधना से पहले यह 5 मिनट की क्रिया होती है।
  • अपने शरीर के मर्म स्थलों का ज्ञान करना होता है और जानना होता है कि कहाँ किस का स्थान है और कहाँ किस प्रकार की क्रिया करने पर क्या होता है। यह भी गुरु द्वारा बताया जाता है।

मानसिक शक्ति का ट्रीटमेंट

  1. आवश्यक है कि आप सचमुच में इसे सीखना या करना चाह रहे है।
  2. आपको अपनी साधना की गंभीरता का ज्ञान होना चाहिए। तंत्र साधानाएं मशीन बनाना नहीं है। इसमें अपनी मानसिक और शारीरिक शक्ति की ऊर्जात्मक व्यवस्था को नियंत्रित करना होता है। यह बच्चों का खेल नहीं है।

विशेष –

तन्त्र एक रूप वनस्पति – खनिजों – जंतु – उनके मल – मूत्रों , फूलों-फलों आदि के हवन – नैवेद्य आदि भी है। इससे कठिन रोगों , भूत-प्रेतादि प्रकोपों , अनिष्टकारी शत्रुओं से निबटने की विचित्र क्रियाएं हैं। यह सिद्धियों से ही होती है; पर इनकी सिद्धि सरल है; ‘ज्ञान’ जो कि तंत्र की रसायन विद्या से सम्बन्धित है का विस्तार बड़ा। इसको जानने और समझने में समय लगता है। यह तकनीकी आधारित विद्या है। इसमें मानसिक शक्ति का प्रयोग कम ही स्थानों पर होता है। यह विद्या सिद्धि और साधनाओं से अधिक खतरनाक है । इसलिए इसमें भी अपने पर संयम रखनेवाला सुपात्र ही पात्र हो सकता है।

  1. मानसिक व्यवस्था की शुद्धिकरण और इसे शक्तिशाली बनाने के लिए भूत शुद्धि के बाद शक्ति पात , न्यास आदि की क्रियाएं होती है; जो गुरु द्वारा प्राप्त और स्वयं द्वारा अभ्यासित होती है।
  2. इसके बाद मन्त्र का चुनाव और उसके रूपध्यान का निर्धारण गुरु करता है।
  3. जप की संख्या पूर्ण होने पर हवन की क्रिया की जाती है। यह लगभग सभी मार्गों में होता है। इसमें कुण्ड , समिधा, हवन सामग्री , दिशा आदि की मंत्र और देवता के अनुसार वर्गीकरण है। कहीं-कहीं ईष्ट के प्रकट होने तक जप और उसके बाद हवन का विधान है।

विशेष –

इन वर्गीकृत क्रियाओं का पालन करके एक सामान्य गृहस्थ स्त्री=पुरुष ; जो सिद्धि नहीं भी चाहता है; अपने जीवन की दिशा को अपने अनुसार नियंत्रित और लाभान्वित कर सकता है। आज एक जीवन में जितने दुःख के कारण है; वे इनके द्वारा दूर कर सकते है।

यह एक भ्रम है कि तन्त्र विद्या केवल जादू – टोने की विद्या है। हमारा सारा आध्यात्मिक जगत , देवी-देवता , मन्दिर , शक्तिपीठ , शिवलिंग , पूजा-पाठ , मंत्र , विज्ञान और समस्त प्रकार की प्राचीन विद्यायें ; यहाँ तक कि ज्योतिष , वास्तु, सामुद्रिक आदि भी इसी विज्ञान पर आधारित है। आध्यात्मिक दुनिया पराशक्ति के गृहस्थों के लिए है और ‘तन्त्र’ वैज्ञानिक रूप है, जो इस विज्ञान के साधकों के लिए है। साधना कठिन है, उपासना सरल। उपासना सामान्य गृहस्थ स्त्री-पुरुष के लिए है।

हम आप सभी किसी न किसी रूप में किसी न किसी ईष्ट की उपासना करते है। चूँकि उपासना को सरल रखने के लिए इसमें किसी ज्ञान-विज्ञान की गहराई को बताया नहीं गया है; इसलिए यह भ्रम उत्पन्न हो जाता है कि ‘तन्त्र’ कोई अलग विद्या है। कोई इसे ‘ब्रह्मविद्या’ कहता है, कोई ‘तन्त्र’ कहता है, कोई ‘तत्व विज्ञान’ पर बात उसी परमात्मा से उत्पन्न होने वाले ‘सिस्टम’ की ही है। सभी अपने-अपने अनुसार उससे लाभ उठाते हैं। नाम में क्या रखा है?

तन्त्र विद्या आपको भौच्च्का कर सेती है। इसके सम्पूर्ण भाव का अर्थ यह है – “ तुम चाहे किसी धर्म – रिवाज-परम्परा को मानों, कोई भी नई व्यवस्था कायम कर लो, तुम मनुष्य रहो या अन्य कोई जीव , तुम ग्रह रहो या चाँद-तारे तुम पर परमात्मा के इस सिस्टम का साम्राज्य है। तुम इस सिस्टम से नियंत्रित हो। अज्ञानी मुर्ख हो या ग्यानी विद्वान, सभी इससे नियंत्रित हैं। कोई इससे परे नहीं । यह ब्रह्माण्ड भी इसी सिस्टम के अधीन अस्तित्त्व में है और क्रिया कर रहा है। यह सत्य तभी ज्ञात होगा, जब अनेकता में एकता की दृष्टि रखकर परिक्षण करोगे।……..जो तुम इसके नियमों के विरुद्ध चलोगे, नष्ट हो जाओगे।”

आश्चर्य यह है कि यह कथन समाज, राष्ट्र, परिवार, संस्था , मशीन आदि सब पर लागू है। तंत्र कहता है कि बायें से दायें सृष्टि क्रम है, दायें से बायें संहार क्रम – एक पेंच भी कसिये , तो यही सूत्र है। ट्रैफिक भी इसी सूत्र पर विश्वभर में चलता है। हमारे या किसी भी जीव-जंतु का बल पीछे से यानी पिछले पोर्सन पर आगे की ओर लगता है; यही सूत्र विश्व के वाहनों पर लागू है। तन्त्र कहता है कि ब्रह्माण्ड की प्रत्येक वस्तु +,- के सूत्र पर काम करती है और यह सभी ओर स्थापित है। इसलिए किसी के मानने या न मानने से वह इस सिस्टम से परे नहीं हो जाता।

अतः उपासना और साधना के आधार भूत सूत्रों को समझकर सामान्य विधि-विधान से करने पर भी चमत्कारिक लाभों की प्राप्ति होती है। कोई भी स्त्री-पुरुष, बच्चा – बूढा इससे लाभ उठा सकता है, चाहे वह किसी भी धर्म- सम्प्रदाय, क्षेत्र या राष्ट्र का को। यह आपको आपका ईष्ट नहीं बताता, यह आपको अपने ईष्ट की कृपा प्राप्त करने का वैज्ञानिक तकनीकी की मार्ग बताता है। यह मार्गों के भी अनेक रूप को भी बताता है। आप शाकाहारी है, मांसाहारी है, दूध पीते हैं या मदिरा का सेवन कर लेते हैं; इसका इन चीजों से कोई लेना-देना नहीं है। सबके लिए रास्ते है।

25 thoughts on “तांत्रिक सिद्धि साधनाओं की प्राप्ति कैसे करें ?

  1. I want to meet you…jab bhi aapke paas time ho…aap time de do plezz mujhe…me bahut dino se aapse milna chahta hu…jo bhi fee hogi ya rukne ka jo bhi kharch hoga wo sab pay kar duga…Plezzz aap mana mat karna…aap jab ka bhi time dege me aa jauga.bahut kripa hogi aapki guruji..sadar pranaam

    1. इस प्रश्न का उत्तर धर्मालय पैर पहले से मौजूद है इस ब्रह्मांड में सवी शक्तियों की उर्जा व्याप्त है.आपके भाव की गहनता से वह केद्री भूत हो कर प्रत्यक्छ होती है .यह यर्क विज्ञानिक प्रक्रिया है .अविश्वास का कोई कर्ण नहीं है .

  2. Pranamguruji ager kisi ke devi devta ko garur kavach se bhandhan ker diya jaye to unhe kase mukt karye ge Wo bandhan todane ke upaye kya hai

    1. व्यक्तिगत मागे दशॆन सम्भव नहीं है , सब टूट पड़े है ं समय और मस्तिष्क खराब करने के लिये ? सब तो साइट पर दे रहा हूँ .इससे बड़ा मागॆदशॆन क्या हो सकता है ? आपको abcd सिखाऊँ ?

  3. वतमन समय में सिद्धी की उपयोगिता क्या हैं

    1. सिद्धि से आपका तात्पये क्या है ? सिद्धि तो हर काम की होती है ,दोड़ने चलने की भी .किसकी क्या उपयोगिता है ,यह जरूरत मंद तय करता है .हमारे यहाँ से कोई आग्रह नहीं होता कि कोई सिद्धि किसी के लिये आवश्यक है .यह शास्त्रीय प्राचीन विद्या है और यदि कोई जानकार उसके गोपनीय डिटेल दे रहा हो, उस विषय को पूरा अन्दर तक सारे रहस्य बता रहा हो, तो आज यह आध्यात्मिक छेत्र की जरूरत है . मधुमक्खी को शहद चाहिये, मच्छर को खून .दोनों की जरूरत दोनों के लिए बेकार है ,तो इसमें मै क्या उत्तर दे सकता हूँ .?

  4. प्रनाम,
    तन्त्र मे सबसे आसान सिद्धि क्या हो सकता है अगर कोई अनुभव करना चाहे …….. ?

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