तंत्र कोई मजाक नहीं है .

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विचित्र हालत है किसी ज्ञान को बताने का प्रयत्न करना ताकि आम जीवन में भी उन सूत्रों से लाभ उठाया जा सके ,मुझे bhaari पर रहा है. लोग पता नहीं तंत्र को क्या समझ रहे हैं ? लोग समझते हैं की सिद्धि साधना कोई तकनिकी है और मार्ग दर्शन चाहते हैं . वह भी  हर आदमी अलग अलग .वे धर्मालय भी नहीं पढ़ते . भाई मेरे जिस रह पर चलना चाहते हो , उसे जान तो लो . यहशास्त्रीय विद्या है और मोटी मोटी प्राचीन किताबें मिल रही हैं .वहाँ से प्रमाणिक मार्गदर्शन  प्राप्त करों ना . उस मार्ग दर्शन से भी सिद्धि नहीं मिलेगी ,मगर यह तो मालूम हो जायगा कि ,जिस साधना  को करना चाहते हैं , उसकी प्रक्रिया कितनी विस्तित ,जटिल और समय लेने वाली है? गुरु काम्ह्त्व और मतलब भी ज्ञात हो जाएगा . बाजारू लोगों ने इसे हलवा पूरी बना दिया है . क्योंकि उन्हें लोगोंको मुर्ख बनाना है . कृपया मुझे तंग न करें .यदि धर्मालय पढने के बाद भी निर्देश समझ में नहीं आता ,तो मैं क्या कर सकता  हूँ?

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