ज्योतिष फल गणना में वर्ण, वर्ग और योनि का महत्व

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सामान्यतया फल गणना में ज्योतिषी एक ही विधा को पकड़ कर बैठ जाते हैं, एक मेथड की कट्टरता कई अन्य बातों से वंचित कर देती हैं, जो जानी जा सकती थी. आध्यात्मिक क्षेत्र की यह बड़ी समस्या है. जो और जितना उसके गुरु ने बताया है, उससे अधिक पर विचार करना महापापम समझा जाता है, पर यह जड़ता है और इसका समर्थन न तो वैदिक आचार्यों ने किया है, न ही तंत्राचार्यों ने. जैसे सामान्य ज्योतिष के किसी मार्ग से एक फल आया और उसी को हमने लाल किताब के मेथड से निकाला. फिर तांत्रिक सूत्रों का प्रयोग करके निकाला, तो हमें कई ऐसे रहस्यों का ज्ञान होता है, जो एक मेथड से जाना संभव नहीं है.

इसी प्रकार ज्योतिष की फल गणना में, कुंडली के कई छोटे विवरणों को सामन्यतया ज्योतिषी महत्व नहीं देते हैं, पर उनसे बहुत कुछ जाना जा सकता है. जैसे वर्ग, वर्ण, योनि आदि. जिस प्रकार सामुद्रिकी में शास्त्र के सभी फल शारीरिक संरचना के अनुसार एक जैसे होते ही भी भिन्न हो जाते हैं, उसी प्रकार ये छोटे छोटे विवरण पूरे फल को बदल देतें हैं. एक खरगोश की बुद्धिमानी और एक सर्प की बुद्धिमानी में अंतर होता है और उनकी समस्याओं का समाधान भी अलग अलग प्रकार से होता है. फिर ये पुरुष और नारी के भेद से भी बदल जाते हैं.

यह ठीक है कि लोग इतने परिश्रम के लिए धन नहीं देते, पर हमारी कोशिश होनी चाहिए. किसी विद्या के प्रति भी हमारा एक कर्तव्य होना चाहिए. हमारा काम अच्छा होगा, तो रिटर्न जरूर मिलेगा.

जो जातक वास्तव में इस विद्या के द्वारा कुछ जानना चाहते हैं, उन्हें भी चाहिए कि पैसे बचने के चक्कर में, बिना मतलब कन्फ्यूज हो कर मानसिक टेंसन और चिंताओं को न खरीदें, इससे लाभ नहीं, हानि बड़ी होगी.

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