जीवनोपयोगी शाश्वत गुरू वचन

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1–बहुत बड़ी मूखॆता है ,दिल का फैसला .भावुकता

की देवी तारा है ,जिसका प्रवाह.काली के काम क्रोध से भी

भयानक होता है .फैसला.हमेशा मस्तिष्क.यानी शिव पावॆती की सलाह पर लेना चाहिये .

2–जो मूखॆ अपनी प्रशंसा करनेवाले की बातों पर विश्वास करता है, वह बीच सड़क पर बबाॆद होता है .

3–

पति या पत्नी भी चापलूसी करे ,तो सतकॆ हो जायें. दूसरे की तो बात ही अलगहै.

4–नदी के भयानक मजधार में जो मूखॆ दूसरे के भरोसे निकलने का भरोसा करता है और स्वयं प्रयत्न नहीं करता वह बीच मजधार डूबता है .

5–चंचल मना कामिनी, ताश के पत्ते, कैपिसिटी से अधिक मदिरापान ,मूखॆ दोस्त, मनमोहक लालसायें ; भरोसॆ के लायक नहीं होते .

6– चंदन, टीका ,मीठी वाणी , त्याग और सेवा का प्रदशॆन,—सावधान !सावधान!सावधान!!!

7—उपवास, निजॆलाव्रत, प्राणायाम,एकान्त समाधि,,गुफा में निवास करने से आत्मा निमॆल नहीं होती ,न ही परमातमा के दशॆन होते हैं ऐसा होता, तो महीनों निजॆला उपवास करनेवाला ,अपनी सासों को नियंत्रित करके धरती ें समाधि लेनेवाले सपॆ को ही यह सब प्राप्त हो जातां.

8–लाखों जप,  रत्न की माला ,शिव का मन्दिर,वृहत पूजा ,हजारों हवन से सिद्धियाँ नहीं मिलतीं य़दि भाव, संकल्प,गुरू के प्रति सब कुछ समपिॆत कर देने का भाव, कठिन अभ्यास, और दृढ  विश्वास ,धैयॆ — इनके बिना किसी भी काम मे सिद्धि नहीं मिलती .

9–आँख,कान, नाक, आदि ग्यीनेन्दरियों से सत्य की अनुभूति नहीं होती .सत्य की अनुभूति पूवे संचित या मानसिक परिश्रम से अजिॆत ग्यान से होती है .

10– जो बोलता नहीं या जो कम बोलता है ,जिसे अपने अपमान पर ‌गुस्सा नहीं आता ,जो प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करता ;ऐसे खतरनाक जीव विशेषकर मनुष्य– समाज, देश, और सारी कायनात के लिये तबाही लानेवाले कोल्ड क्रिमनल होते हैं .

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