चमत्कारिक महादुर्गा तेल

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गठिया रोग, पक्षाघात, नसों के दर्द, स्नायविक दर्द, संधि पीड़ा, हड्डीयों की दुर्बलता की तन्त्र सिद्ध चमत्कारी दवा ‘महाबला अर्क’ और ‘महादुर्गा तेल’

श्री महादुर्गा तेल – बकायन के फल या पत्ते, मदार के पत्ते , सम्मालू के पत्ते, एरण्ड के पत्ते, सेंहुड के पत्ते, भांगरा के पत्ते, कनेर के पत्ते, काले धतूरे के पत्ते, हिंग , कालानमक , सेंधानमक , पीपर , सोंठ , चीता , इंद्र जौ –

बनाने की विधि – सभी पत्तों को 100-100 ग्राम रस निकाल लें। इसमें 50 ग्राम प्रति – पीपर, सोंठ , चीते के छाल, इंद्र जौ – पीसकर (खूब महीन) मिला दें)। फिर इस मिश्रण में 50 ग्राम हिंग , 50 ग्राम काला  नमक , 50 ग्राम सेंधा नमक पीसकर मिला दें।

इसमें आधा किलो लहसुन , 100 ग्राम भाँग पीसकर मिला दें।

इसमें दो लीटर काले तिल का तेल डालकर बर्तन को अच्छी तरह  बंद करके (शीशे का बर्तन) 9 दिन धूप में रख दें। फिर इसमें 4 गुणा गौ मूत्र मिलाकर घी मी आँच पर गर्म करें। जब सब जलकर तेल रह जाए;तो इसे कपड़े से छानकर निचोड़ लें। इस प्रकार प्राप्त तेल 1200 ग्राम के लगभग प्राप्त होगा।

कोई घर में तैयार करें , तो इसके जले बीट भी गर्म करके मालिश करने से तेल जैसा ही लाभ होता है।

लाभ – यह एक चमत्कारी औषधि है। इस तेल को गर्म  करके प्रतिदिन मालिश करके कपड़ा लपेटने से – सभी प्रकार के वात रोग नष्ट होते हैं। शरीर में व्याप्त दूषित वायु निकल जाती है। हड्डी के दर्द, स्नायु के दर्द, चोट, मोच, नसों के दर्द, जोड़े के दर्द , गठिया , पक्षाघात , अर्दित (मुख लकवा) सभी लिंग विकार भी नष्ट करता है। कुछ दिनों में नष्ट हो जाते हैं। यह घर में रखने योग्य दवा है। चोट, मोच, ठंड के दर्द , अचानक शरीर में दर्द, हृदय के वायुशूल , योनि विकार आदि में तुरंत लाभ करती है। यह गठिया का भी इलाज है।

 

धर्मालय से बनवाकर मंगवाने पर 200 ग्राम का पैक 2500 रु + 100 रु . डाक व्यय पर उपलब्ध होगा।

 

  1. महाबला अर्क – जंगली बेर की गुठली , रेवंद चीनी, अकरकरा, कुचले के फलों का कोपला , बच, मिलावे की गौमूत्र में फुलाई गिरी, काली देशी राई, काली मिर्च , अरंडी की गिरी, महानीम (बकायन) की अंतर छाल – 50-50 ग्राम पीसकर मिक्सी में खूब घोंटे।

फिर इसे 1 लीटर मदिरा में डालकर 21 दिनों तक छोड़ दें। इसे लगातार हिलाते रहें। इसके बाद इसे छानकर बोतल में बंद कर लें। दिन में प्रातः सायं 10 ग्राम एरण्ड का तेल गर्म पानी के साथ लें।

 

लाभ – यह अर्क 10 बूँद गर्म पानी के साथ दिन में तीन बार लेने पर – मुंह का लकवा, पक्षाघात वायु विकार, शरीर और कर्म के दर्द , संधि का दर्द, नसों की वायु नष्ट हो जाते है।

वात रोगी को पेट साफ़ रखना चाहिए। एरण्ड का तेल दूध + गर्म पानी के साथ सभी प्रकार के बच्चे, बूढ़े, स्त्री के लिए सुरक्षित जुलाब है।

 

धर्मालय से बनवाकर मंगवाने पर 100 m.l.  का पैक 2500 रु + 100 रु . डाक व्यय पर उपलब्ध होगा।

 

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