घर बैठे गंगा स्नान का चमत्कारिक फल

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‘तन्त्र’ में जिस गंगा का वर्णन है और जो वैदिक ऋषियों के अनुसार ब्रह्मा के कमंडल से निकली ‘गायत्री’ या ‘सावित्री’ है; वह नदी गंगा नहीं है। जिस गंगा का जल साधनाओं में मूलाधार के श्याम शिवलिंग पर डाला जाता है; वह देव गंगा है; जो ‘हरिद्वार’ (सिर के सहस्त्रार मध्य) से लाकर मूलाधार पर गिराया जाता है। इसी गंगा के संगम में ध्यान मग्न होकर डुबकी लगाने से पाप कटते है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। नदी गंगा प्रतीकात्मक है, क्योंकि कभी इसके जल में ‘आर्यावर्त’ के मानसरोवर के जल की पवित्रता और शक्ति होती थी। स्मरण रहे। इस गंगा को  खोदा गया था। यह ब्रह्मा के कमंडल से निकली देव गंगा नहीं है। मंत्र, वास्तु गणना और अन्य कारणों से इसे देव गंगा के सदृश्य अवतरित किया गया था। पर पापियों के समाज में किसी देवी की पवित्रता कैसे नहीं रह सकती है? हमारा पाप गंगा को इतना प्रदूषित कर चुका है कि अब यह डुबकी लगाने के लायक रही ही नहीं।

अतः मैं सभी गृहस्थ युवक/युवती-स्त्री/पुरुष – आस्थावानों को एक ऐसी विधि बताने जा रहा हूँ, जिससे वे प्रतिदिन नहाते समय गंगा स्नान का फल प्राप्त कर सकते है। यदि कोई गाँवों में रहता है या उसके घर के आसपास कोई शुभ पेड़ है, तो और भी अच्छा।

सबसे पहले बाथरूम स्नान ।

बाथरूम में लोटे से नहायें या शाबर से। नहाने से पूर्व सिर के चाँद पर ऐलोबिरा का गुदा/ बेलपत्र की पीसी हुई लुगदी/ खीरे-कद्दू-तरबूज-आदि का रस- इसमें से कोई भी मालिश करके आधा घंटा छोडें और फिर बाथरूम में पालथी मारकर सुखासन में बैठकर सिर के चाँद पर पानी गिराते हुए स्नान करें। इस समय ‘हर हर गंगे’ का य ‘ॐ नमः शिवाय’ का मंत्र जाप करे और पूर्ण विश्वास के साथ ध्यान में कल्पना करे कि वह जल की धारा शिव की जटाओं से निकली हुई ऊर्जा रूप श्वेत की धारा है, जो अमृत रूप है। आँखें बंद होते हुए भी आपको बहती जलधारा ऊर्जा रूप चमकती नजर आएगी। यह कल्पना करे कि वह आपके शरीर के रोम-रोम को प्लावित करते हुए अंदर-बाहर के सभी विकारों को प्रवाहित करते  भूमि में समा रही है। एक महीने करके देखें। लाभ चमत्कार स्वयं अनुभूत करें। हमारे कहने पर विश्वास नहीं होगा। आखिर स्नान तो करते ही है, इसमें न परिश्रम है न व्यय!

यदि कोई शुभ पेड़ हो

उसके पत्तों से भींगा दीजिये। फिर कुछ डालियों को समटेकर बांधिए ताकि उनपर डाला जल वहां से धारा रूप में गिरे। इस धारा को ऊपर दी गयी विधि से प्रयोग करें। ऊपर उन पत्तों पर पाइप से पानी गिराए। यह आक्सीकृत जल है। गर्म पानी भी ठंडा हो जाता है।

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