गुप्त चमत्कारिक ताबीज, बाजू में बाँधने का बंद, गले की बद्धियाँ, गुटका, बीज, बाधा निवारक त्रिशूल आदि (स्वयं बनाये या हमसे मंगवाए)

रक्षा ताबीज

श्री चक्र या भैरवी चक्र एक पतले कागज़ पर मदार की कलम या होल्डर या मोटी पेसिंलनुमा आम की लकड़ी की कलम से बनाये।  स्याही लाल रंग में केसर मिलाकर बनाये।  इस पर फिटकरी और सुहागे का चूर्ण छिड़के और कपड़े के ताबीज में बंद करके काले धतूरे , मदार और अपामार्ग के रस में अलग-अलग डुबोकर 24 घंटे रखें।

सूखने पर इसे एक ताम्बे के पात्र में में रखकर निम्नलिखित मंत्र पढ़ते हुए धतूरे के फूल से जल भिंगो-भिंगो कर छिड़के।  यह क्रिया रात में 9 बजे से के बजे के मध्य करें।  आसन सूती लाल , वस्त्र ढीला लाल, दीपक सरसों तेल , आसन का मुख अग्नि कोण।

दो घंटे तक मंत्र पढ़े।  अगले दिन इसे सुखालें।

यह ताबीज रविवार के दिन प्रातःकाल उसी मंत्र को जपते हुए , कमर/गले/या बाजू में बाँध लें।

यह ताबीज किसी प्रकार के बाहरी अदृशय शक्तियों , जादू-टोना, नजर आदि से पूर्ण रक्षा करता है।  पूरी तरह परीक्षित है।

मंत्र – ॐ क्रीं क्रीं क्रीं कालिकाय नमः

अन्य ताबीज

  1. इस प्रकार के श्री चक्र को बरगद , गूलर, मदार के रस में सिद्ध करके फिटकरी और नौसादर का चूर्ण छिड़ककर निम्न मन्त्र से सिद्ध करने पर इसे बाँधने वाला रतिक्रिया में कभी नहीं हारता।

मंत्र – ॐ क्लीं क्लीं क्लीं कामायनी नमः

 

  1. इस प्रकार के श्री चक्र को ताबीज बनाकर उपर्युक्त 108 मन्त्रों से सिद्ध करके पारे में तर करके राना ट्रिगिना नामक बड़े पीले मेढक के पेट में डालकर मिट्टी के घड़े में धतूरा भर कर मिट्टी दबाकर 6 महीने के बाद उसे निकाले और ताबीज गंगाजल से धोकर बांधे, तो अभूतपूर्व स्तम्भन होता है।

(यह ताबीज हमारे यहाँ प्राप्य नहीं है)

 

  1. इस प्रकार के श्री चक्र को प्याज के रस से अंकित करके उसे मदार के दूध में 36 घंटे रखें।  कलम नीम की तिलिका।  फिर इसे नौसादर एवं कली चूना के समान मिश्रण 10 ग्राम बनाकर एक मोमजामा (सफ़ेद प्लास्टिक ले लें) में बंद करके लाल रंग के कपड़े के ताबीज में बांधकर उत्तर की ओर लटकाए और सामने बैठकर निम्न मन्त्र का 1188 बार जाप करें।

मंत्र – ॐ ह्रीं क्रीं श्रीं क्लीं क्लीं क्लीं रति प्रियाए  नमः

इस ताबीज को सुई से तिन बार आर-पार बेध कर पानी में भिंगो कर जिस स्त्री – पुरुष को सुंघाया जाएगा , वह वशीभूत होगा।  यह वशीकरण तीन घंटे रहता है।  इस बीच साधक वशीभूत से जो चाहे करवा लें।

बाजू बंद और बद्धी

  1. काले रंग के धागों से गले में पहनने और बाजू में बाँधने का तागा बनाकर इसे तीन दिन काल धतूरे के रस में डुबायें, फिर इसे लाल मिर्च के घोल में रखें फिर इसे लौंग के घोल में रखें। प्रत्येक बार सुखा-सुखा कर (पूरा रस) ।  फिर इसे अपामार्ग और मदार की लकड़ी की समिधा में , हिंग, लहसुन, और मदिरा के पेस्ट से हवन करते हुए , उसके धुंए से (ऊपर लटकाकर ) सिद्ध करें।

ॐ काल भैरवाय नमः

यह बाजू बंद एवं धागे (बद्धी) जो – जो पहनेगा –

  1. बच्चे प्रत्येक प्रकार की नजर, ऊपरी प्रकोप, जादू-टोना से बचेंगे और रोग के कीटाणु भी उसके पास नहीं पहुचेंगे।
  2. स्त्रियों की उपर्युक्त लाभ के अतिरिक्त भूत-प्रेत प्रकोप , मिर्गी – हिस्टीरिया रक्षा होगी और दुष्ट स्त्रियों द्वारा की गयी किसी कार्यवाई से सुरक्षा होगी। इससे शनि के कारण हुई सन्तान बाधा भी नष्ट होगी।
  3. युवा पुरुष बांधे तो शत्रु/रोग/बाधा से रक्षा होगी। धातुगत कमजोरी नहीं होगी।  कामशक्ति नियंत्रित रहेगी और शनि बाधा दूर होगी।
  4. वृद्ध पुरुषों को शनि से सम्बन्धित बाधा नष्ट होगी और यदि उम्र 60 से अधिक है, तो नींद , नर्वस सिस्टम , हड्डी एवं बालों की रक्षा होगी।
  5. लाल रंग के बाजूबंद , बद्धी, रक्षा सूत्र को अपामार्ग की जड़, गूलर की जड़ और दालचीनी , लौंग, इलाइची के साथ पीसकर पानी में घोल कर उसमें डालें और नीम के वृक्ष की जड़ में दबा दें। तीन दिन बाद उसे छाया में सुखा लें।

इसे ‘ॐ दुर्गाय नमः’ 1188 मन्त्र से रात में अपामार्ग की समिधा में मधु का होम करके सिद्ध करें ।  फिर बुधवार को कमर में पहने।

 

  1. स्त्री की मासिक बाधा दूर होती है । उसके फेफड़े-गर्भाशय के विकार दूर होते हैं।  सभी प्रकार की ऊपरी बाधा से रक्षा होती है।
  2. बच्चों की वृद्धि, पढ़ाई और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है।
  3. व्यापार , व्यवसाय, केतु, पाँव आदि की शक्ति बनी रहती है, प्रतियोगिताओं में सफलता मिलती है।

गुटका

अकरकरा , धतूरे की जड़, कनेर की जड़, पोश्त की ढोढी , भांग की पत्ती- इन्हें पीसकर पानी में घोलें और इसमें जिमीकंद का पिसा हुआ गूदा मिलाकर छोटी सुपारी इतनी गोलियाँ बनाकर सुखा लें।

इन गोलियों की के गोली एक पाव दूध में पांच मिनट कपड़े में बांधकर रखें।  फिर निचोड़कर कपड़ा फेंक दें।  यह दूध भोजन से दो घंटा पहले पीलें।

यह अत्यंत कामोत्तेजना को उत्पन्न करता है।  बार-बार रतिक्रीड़ा करने की उत्तेजना आती है।

सावधानी – यह के नशीली योग है।  घी, मलाई, सौंफ प्रयोग करना अपेक्षित है।  बराबर देख कर प्रयोग करें।

 

बीज

आम की सुखी  गुठली को मधु, भांग, अकरकरा , सहदेई, मदनमस्त , धतूरा , थूहर के दूध – के साथ पानी में घोलकर उसमें डालें।  24 घंटे के बाद मिट्टी में बोकर ऊपर से यह जल डाल दें।  इस स्थान पर प्रतिदिन अपना मूत्र त्याग करें।

यह पौधा जब वृक्ष बनकर फल देगा, तो इसका वृक्ष का पका फल कामोत्तेजक और वशीकरण की शक्ति के युक्त होगा।  जो खायेगा।  रति में सशक्त होगा और स्त्री खाएगी, तो वह वशीकृत होगी।  वशीकरण पुरुष पर भो होगा, पर वह कामभाव का नहीं मित्र भाव का होगा।

 

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