क्या ज्योतिष के द्वारा अगला-पिछला जन्म जाना जा सकता है?

धर्मालय के प्रसार में सहयोग करें

इसकी एक प्राचीन विधि का मुझे ज्ञान है। यह मुझे अपने प्रारंभिक गुरु से ज्ञात हुई थी, जब मैं इन बातों पर विश्वास ही नहीं करता था।पर उन्होंने मेरे जीवन के बारें में जो कुछ बताया; वह भी हाथ देखकर  – सब कुछ वैसा ही हुआ। वे जबदस्ती मेरे गुरु बन गये थे; क्योंकि मेरे चाचा थे। पिता के चचेरे भाई, जो सन्यासी हो गये थे और स्थानीय सत्ती स्थान में कुटिया बनाकर रहते थे।

पिछले जन्म के लिए नेगेटिव कुंडली बनती है; अगले जन्म के लिए पॉजिटिव । इसका अर्थ हुआ कि नेगेटिव  में लग्न  12 वें में चला जाता है और दूसरा खाना 11 वें में। इसी प्रकार क्रम से सभी उल्टे हो जाते है। इसका सनातन सूत्र है नेगेटिव के अनुसार ही पॉजिटिव कि उत्पत्ति होती है। अगले जन्म के लिए 12 वां खाना लगना में चला जाता है, 11 वां दूसरे में और इसी क्रममें सब स्थापित होते हैं। इससे नवांश कुंडली, चन्द्र कुंडली सभी कुछ बनाया जा सकता है।

परन्तु सबसे बड़ी समस्या यह है की अगले-पिछले जन्म के बारे में जातक सत्यापन किस प्रकार करेगा? पिछला जन्म याद नहीं रहता, अगला जन्म आया ही नहीं रहता। यह गणना पूरी तरह वैज्ञानिक सूत्रों पर आधारित हो जाती है। इसके सत्यापन का कोई रास्ता मुझे ज्ञात नहीं है। हाँ प्रवृत्तिमूलक लक्षणों से सत्यापन किया जा सकता है।

आवश्यक नहीं की यह कुंडली किसी मनुष्य कि हो; क्योंकि मनुष्य कि प्रजाति विचित्र है। इसमें सभी जीव-जन्तु के प्रतिनिधि मौजूद है।

 

धर्मालय के प्रसार में सहयोग करें

12 Comments on “क्या ज्योतिष के द्वारा अगला-पिछला जन्म जाना जा सकता है?”

  1. mujhe aisa lagata hai ki, me apane pichhale janam ke baare me bahut kuchh janata hu, (swapan aur apne antarman ke ahsas ke dwara)
    Kya aap mera margdarshan kar sakate hai.

    1. जब आप जान रहे हैं , तो मार्ग दर्शन किस शिलशिले में चाहते हैं, पहेली मत बुझाए , कुंडली बनाने का तरिका मैंने बता दिया है , बनवाए और फल देखे

  2. पत्रीका मे शुक्र का अस्त दिखता है , अगर निच स्थान मे है तो उसका उपाय कर सकते है क्या , जागृत कर सकते है क्या

    1. यह उपाय पूरी कुंडली कि गणना के बाद ही तय किया जा सकता है . कोई भी ग्रह कई कारणों से नीच होता है| स्वयम कोई ग्रह अच्छा या बुरा नहीं होता| अपने स्थान , अपने साथ के ग्रह या दूसरे ग्रह की दृष्टि के कारण या शत्रु राशि में रहने के कारण ख़राब होता है| इलाज कारण का किया जाता हैं ग्रह का नहीं और कारण ढूँढने के लिए पूरी कुंडली की गणना करनी होती है| इसके लिए आपको कुंडली दिख्वाना होगा और जब भी गणना की जाती है वह पूरी होती है| किसी एक कि नहीं क्योंकि उसमें सभी खानों की गणना होती है| इसलिए यह सीधे बताने का मामला नहीं है| हमारे यहाँ कुंडली की गणना हाथ से किया जाता है

  3. श्री मान जब नेगेटिव बनाएंगे तो पिछले जनम का नेगेटिव और अगले जन्म का पोजिटिव एक जैसा ही तो होगा…. अगर लग्न बारहवें में जाएगा और दूसरा घर ग्यारहवे में तो ग्यारहवां दुसरे में और बारहवां लग्न में भी तो जाएगा. मैं जब अपनी कुंडली की कैलकुलेशन करने लगा तब ज्ञात हुआ.. उन्दाहरण के लिए देखें
    Current Birth Negative Positive
    1 . 1 . 1 .
    2 . 2 . 2 .
    3 . 3 CHNADRA RAHU 3 CHANDRA
    4 MANGAL, KETU 4 . 4 .
    5 SHANI 5 . 5 .
    6 BUDH 6 SURYA, SHUKRA, GURU 6 SURYA, SHUKRA, GURU
    7 SURYA, SHUKRA, GURU 7 BUDH 7 BUDH
    8 . 8 SHANI 8 SHANI
    9 . 9 MANGAL, KETU 9 MANGAL, KETU
    10 CHNADRA RAHU 10 . 10 .
    11 . 11 . 11 .
    12 . 12 . 12 .

    कृपया बताएं कि सही कैलकुलेशन कैसे करें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *