कोरोना वायरस दवा और इलाज

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चीन के एक शहर  से फैले वायरस कोरोना ने विश्व भर में खतरे की घंटी बजा रखी है.इसकी अब तक कोई दवा ज्ञात नही है , ऐसा कहा जा रहा है . वैक्सीन तैयार किये जा रहे है , जिसमें न्यूनतम तीन महीने लगने की संभावना है.

क्या सचमुच ? क्या सच में जब तक बहुराष्ट्रीय कम्पनियां इसकी दवा नहीं बनाएंगी , तब तक मानवता और मनुष्य यन्त्रणा भोगेंगे या मरते रहेंगे?

धोखे में मत पड़ें. रोग, महामारी वायरस आदि के नाम पर विश्व में लाखों करोड़ो का दवा व्यवसाय चलता है. इंसान की लाशों पर धंधा करनेवाले इन लोगों के बड़े बड़े गरीबों को डराने वाले आलिशान हॉस्पिटल विश्व के हर गली, मुहल्ले , चौराहों पर मिल जायेंगे. यह  पूरा व्यवसाय बहुराष्ट्रीय दवा कम्पनियों ने अपने कब्जे में कर रखा है और ये किसी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति को पनपने नही देना चाहते. सरकारें इनके कब्जे में धन के कारण होती है  और ये अपने सिवा हर वैकल्पिक व्यवस्था को हानिकारक और मिथ्या कहकर प्रतिबन्ध लगवा देती हैं.

धर्मालय इनसे अलग हटकर जनहित में कार्य करने वाली एक संस्था  हैं , जो प्रत्येक प्रकार के विषम और जटिल रोगों की वैकल्पिक परम्परागत चिकित्सा और औषधियों के विवरण अपने साईट पर प्रसारित करता है. यह संस्था कोई दवा नही बनाती , न ही किसी दवा का व्यापार करती है . प्राचीन विद्याओं और चिकित्सा विधियों पर 33 वर्ष तक अन्वेषण और शोध करनेवाले एक बुद्धि जीवी ने जनहित में इस सूचनाओं को अपने शोध और अनुभवों के साथ वेबसाइट पर प्रसारित करने का बीड़ा उठाया है .

हमें किसी भी चिकित्सा पद्धति से प्रेम या बैर नही है. हम चाहते है कि रोग – व्याधि-चिंता –शोक से जिस विधि सेभी सरलता से  मुक्ति मिल जाये, वह भगवान् का वरदान है.

हेमियोपैथिक चिकित्सा में है कोरोना वायरस का इलाज

हम सनातन धर्म के ज्ञान – विज्ञान के अन्वेषक है. इस कारण हमें आयुर्वेद और तन्त्र की चिकित्सा विधि बतानी चाहिए . यह है भी . पारिजात के 15 ग्राम पत्ता को कुछ काली मिर्च के साथ पीसकर एक गिलास 250 ml पानी में घोलकर छानकर दिन में तीन बार पीने से यह वायरस और इससे उत्पन्न विकार दूर हो जायेंगे . यह वनस्पति सभी प्रकार के हानिकारक वायरस को मारने में सक्षम है . मलेरिया, कालाजार , टाइफाइड जैसे ज्वरों पर यह हमारे द्वारा सैकड़ों बार परीक्षित है . पर यह कोरोना पर परीक्षित नहीं हैं. इसलिए हम इसके निदान के लिए हेमियोपैथ की एक दवा को जनहित में प्रसारित कर रहे है.

हेमियोपैथ को यूरोप सहित विश्व के कई देशों में मान्यता नहीं है. पर यहाँ भारत में और विश्व के कई देशों में हैं. हम इसकी इस दवा को इस वायरस का निदान इसलिए बता रहे है कि इस चिकित्सा पद्धति में कारण और कारण के कारण का पता करने जैसा कोई नियम नहीं है . यह पूर्णतया रोग के लक्षणों पर आधारित है, बल्कि यही इसका सूत्र है . कारण कोई भी हो, लक्षण मिल रहे हो, तो दवा काम करेगी ही. यह सूत्र काम करता है और  विश्व के सभी हेमियोपैथ डॉक्टर इसको जानते है.

कोरोना वायरस की दवा

संखिया  नामक एक घातक विष होता है  .  आयुर्वेद में इसे भयानक विषों में बताया जाता है . इससे हेमोपैथ  में आर्सेनिक नामक एक दवा बनाई जाती है . यह निम्नलिखित लक्षणों में  100 प्रतिशत काम करती है :-

सर्दी,जुकाम, नाक आँख से पानी बहना, गले में खराश के साथ लसीला बलगम बनना , साँस लेने में कठिनाई , कमजोरी, सुस्ती , लीवर में विकार और सूजन , ज्वर , उत्ताप , प्यास, बैचैनी – इसके साथ  भय.

भय को तो इस विषय पर लक्षण मानना गलत ही  होगा. सारे विश्व की मानवता को मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से भयभीत कर दिया गया है. जो शिकार हुआ वह भय से ही मर जाये , तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

अन्य लक्षण मिलते हों , तो हेमियोपैथ की ‘आर्सेनिक’ एल्ब -30 इसकी सटीक दवा है.

दवा लेने की विधि

सुबह या किसी भी समय खाली पेट बिना पेस्ट के ब्रश से दांत साफ़ करके जिभिया से जीभ साफ करें . अच्छी तरह कुल्ला करके उपर्युक्त दवा को 25 ml डिस्टिल्ड वाटर में एक बूँद डालें   और खूब हिलाकर पी जाए .  शीशे, स्टील का बर्तन प्रयोग करें .

इंतज़ार करें

दूसरी खुराक लेना वर्जित है.

एक हफ्ता इंतजार करें .लाभ नजर आये , तो भी दूसरी खुराक कम से कम 15 दिन तक न लें .

आर्सेनिक का प्रमुख लक्षण , सर्दी जुकाम , गले में खरास , पानी बहना, नाक बंद होना, छींक , साँस लेने में कठिनाई , 100 से अधिक ज्वर , बेचैनी और प्यास है. इसके साथ ही फेफड़े में जकड़न, लीवर में विकार और सूजन , पाचन तन्त्र की गड़बड़ी है .

यदि रोग निमोनिया के स्टेज पर पहुच गया हो –

यदि इस वायरस के रोगी का रोग निमोनिया तक पहुँच गया हो, तो ‘एन्टिम आर्स’ (ऐनीटोनियम आर्सेनिकम)का 30 पॉवर उपर्युक्त तरीके से प्रयुक्त करें .

  1. दोनों दवा में दूसरी खुराक वर्जित है . पर कुछ डॉक्टर एक हफ्ते के बाद एक बूँद की दूसरीखुराक की अनुमति देते है .
  2. प्याज, लहसुन, तम्बाकू , तेल मसाला , फ़ास्ट फ़ूड आदि वर्जित है .

लैकेसिस – 30

एक प्रकार के सांप के विष से तैयार होने वाली यह दवा भी उपर्युक्त लक्षणों में व्यवहार में लायी जाती है ; पर यदि आँख नाक से गिरने वाला पानी ठंडा न हो , सांस खींचने में परेशानिहो, छोड़ने में नहीं , ज्वर हो, बेचैनी हो , हतपिंड जकड़ा लगे . फेफड़े शिथिल से लगें ,पाचन तन्त्र की गड़बड़ी हो , लीवर और में  दर्द या सूजन हो  . छींक आये, पेशाब गर्म हो या शरीर में या किसी अंग विशेष  में  दाह हो , तो ‘आर्सेनिक’ ही उसकी सटीक दवा है .

यह एक अत्यंत सस्ता इलाज है . 10-15 रु की दवा में 20-25 व्यक्ति को रोगमुक्त किया जा सकता है .

यह आयुर्वेद और तन्त्र के उस सूत्र को भी वहन करता है, जिसमें कहाँ गया कि जैविक खनिज और वनस्पति से एवं खनिज विष जैविक विषों से विधि पूर्वक प्रयोग  करने पर नष्ट किया जा सकता है .

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