कामसाधनाओं का रहस्य

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इसका दायरा बहुत व्यापक है। इसके माध्यम से सभी प्रकार की सिद्धियाँ अल्पकाल में प्राप्त होती है। पहली महत्त्वपूर्ण साधना में कमर +रीढ़ की जोड़ के मध्य बनने वाली काम ऊर्जा (कंकाली/ कामख्या ) को रीढ़ के मध्य से मस्तक के चाँद (पार्वती ) में मिलाया जाता है। यह – को मोड़कर + से मिलाने की प्रक्रिया है। इससे शॉट-सर्किट होता है और मस्तक का चाँद स्वच्छ होकर अधिक अमृत (सावित्री/बिंदु ) को प्राप्त करने लगता है। इससे कई प्रकार के दिव्य गुणों एवं शक्तियों की प्राप्ति होती है।

वाममार्ग में और शैव मार्ग में भी काम साधनाओं का व्यापक बोलबाला रहा है। स्त्री इसमें देवियों (अपनी प्रकृति के अनुसार भिन्न-भिन्न ) के रूप में पूजी जाती है। पहले शक्ति नारी को प्राप्त होती है। उसी से पुरूष में संचरण करती है और पुरुष को प्राप्त शक्ति नारी में संचरण करती है। उद्देश्य साधना होती है , रति नहीं।

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