कामकला काली की गुप्त साधना (2)

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कामकलाकाली की साधना का समय रात के 9 से 1 है. इसे 14 कृष्णपक्छ में पूजा करके प्रार‌म्भ करना चाहिये .

पूजाविधि –आसन,वस्त्र, स्थान ,दिशा आदि की शुद्धि करें.शास्त्रीय स्तर पर सबके मंत्र अलग हैं ,पर इसका सरल तरीका यह है,कि 21 मूल मंत्र से जल को सिद्ध करके ,इसी मंत्र से तीन तीन बार मंत्रसिद्ध जल ले कर मंत्र पढ़ते हुऐ प्रोक्छण करें .’हुं फट्’ से दिक बन्धन करें .

षडंग न्यास –क्रम से पाँच बीज और एक देवी का नाम  से छै अंगों का न्यास करें .

आवाहण –तब सारी तैयारी करके ,धूप दीप नैवेद्य आदि समपॆण करने के वाद यंत्र का सामान्य पूजन करें ,फिर योनिरूपा त्रिकोण के मध्य से काली को निकलते रूप मे ध्यान लगा कर आवाहन मंत्र का जाप करें. 

आवाहण मंत्र –ऊँ ह्री क्लीं आं काम कला काली आगच्छ आगच्छ स्वाहा .

 इसमें समय लगता है. कभी कभी कई दिन .तब बीच में रोकने के लिये केवल हाथ जोड़ कर आग्या ले कप उस दिन का काम समाप्त करना चाहिये और दूसरे दिन फिर वहीं से करें वास्तविक कठिन काम यही है .जबतक योनिमध्य से वह निकलता रूप कल्पना में दृढ़ न हो जाय .

अध्यॆ — तब फूल दीप आदि से उस रूप की पूजा करें .

मंत्र जाप –उसी ध्यान रूप में ध्यान करके प्रतिदिन मंत्र जप करें . एक संख्या अपनी सामथ्यॆ के अनुसार निधाॆरित कर लें. मंत्र जप की संख्या तीन लाख है .

  त्रुटियाँ होती हैं और कभी कभी संख्या पूरी होने पर भी देवी प्रकट नहीं होती .तब मंत्र जप जारी रखना चाहिये .मंत्र की अलौकिक शक्तियाँ तो एक लाख के बाद ही प्राप्त होने लगती हैं .

बलि–जप समाप्त होने पर बलि दें .बलि का अथॆ यहाँ प्रसाद चढ़ाना है .यह संस्कार और सात्विक – तामसी विधि के अनुसार स्वयं निधाॆरित होती है यानी जो आपकी श्रद्धा हो .वैसे सात्विक में पुआ खीर एवं तामसी में मछली भात की परम्परा है .

बलि मंत्र –ऊँ क्लीं क्लीं क्लीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रूं ह्रूं ह्रूंमहाकाली महाबलि गृह गृह भक्छय भक्छय स्वाहा .

हवन–गूलर की समिधा मे बेल से. .गुलर की समिधा में मांस से . 

श्मसान साधना –चिता से प्राप्त हड्डियों को एक स्थान चुन कर वहाँ दिन में स्नानादि के बाद धरती में सवा हाथ नीचे गाड़ कर,मिट्टी भैंस के गोबर से लीप कर दक्छिणमुखी आसन बना कर सामने सिन्दूर और बकरे के रक्त मे अपना रक्त बूंद मिला कर यंत्र रचना की जाती है और उसे 3000 मंत्रो से सिद्ध करके सब कुछ पूवॆ वणिॆत तरीके से होता है ..

रूप ध्यान — काली के किसी भी उग्र रूप का ध्यान करें .कामकलाकाली का गुप्त प्राचीन रूप ध्यान बहुत भयानक है फिर भी यदि उसी रूप का ध्यान करना है, तो उसे सप्तावरण पूजा में दिया जा रहा है ,जि 

नमें भैरव, यक्छिणी आदि अंग देवता भी हैं .

विशेष– इस यंत्र और विधि से काली के सभी भेदरूपों की सिद्धि की जा सकती है .

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