आध्यात्मिक मार्ग से सबकुछ बदल सकता है, मगर ……..

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आज के लाइफ स्टाइल में प्रत्येक व्यक्ति  परेशान है और प्रत्येक को लगता है कि उसकी समस्याएं सबसे बड़ी हैं। इन समस्याओं से परेशान होकर वह किसी ऐसे चमत्कारिक पुरुष या महिला की तलाश करता है, जो चमत्कारी देव पुरुष हो और पलक झपकते हाथ के इशारे से उसकी समस्याएं दूर कर दे। हमारे पास प्रतिदिन ऐसे दर्जनों पत्र आते हैं। लोग आशा करते हैं कि मैं एक उपाय बता दूंगा और उनकी सभी समस्याएं दूर हो जाएँगी।

इन लोगों को लाख समझाओं कि जिन्दगी अलिफ़लैला की कहानी नहीं है। खाना खाने के लिए उसे पकाना पड़ता है । आध्यात्मिक ज्ञान या गुरु की शक्ति आपको समस्याओं से निबटने में सफलता उत्पन्न कर सकती है। आपको अतिरित्क शक्तियों से सम्पन्न कर सकती है; किन्तु खाना तो आको पकाना पड़ेगा। गुरु तो केवल इतना बता सकता है कि अन्न नहीं है, तो आप अपने अगल-बगल से क्या प्राप्त कर सकते है , पानी नहीं है, तो खाना कैसे बना सकते है और ईंधन नहीं है, तो सूर्य की रौशनी का उपयोग कैसे कर सकते हैं। आध्यात्मिक जगत एक रहस्यमय वैज्ञानिक जगत है। इनको इसी रूप में समझना चाहिए। हवा में हाथ हिलाकर सेव-लौंग-सुपारी पैदा  नहीं किया जा सकता, न ही कोई आपके सिर पर हाथ रखकर आपकी समस्याओं दूर कर सकता है। यंत्र , ताबीज , पूजा, हवन, मंत्र, साधना , सिद्धि – सभी की सीमाएं होती है। आप पैदल चलते है, साइकिल मिल गयी , तो गति तेज हो जायेंगी, मोटर साइकिल मिली तो और तेज और  कार  मिल गयी तो आराम भी। पर चलाना तो सबको पड़ेगा। आपकी टी.वी. में 100 चैनल है; उसे कोई इंजिनियर 300 चैनल का बना दे, कोई ऐसा यंत्र फीट कर दे कि विश्व के सभी चैनल उस पर आ जाए; पर आप उसे स्टार्ट ही न करें। प्रतिदिन धूप-दीप दिखा कर मंत्र करते रहे, तो क्या होगा? आपने मन्त्र जप या मन्त्र का चुनाव उस रूप में नहीं किया है कि वातवरण से उसे बिजली मिले और आवाज पर वह चल पड़े। ऐसा हो सकता है, पर यह सिद्धि क्षेत्र है और यह समस्याओं से निबटने का मार्ग नहीं है। आपको भूख लगी है और आप इस प्रयोग में लगे है कि बंजर में नारंगी कैसे पैदा किया जा सकता है; तो हर कोई आपको देखकर हंसेगा।

समस्याओं के लिए आपको उसके दूर करने की तड़प, सक्रियता और दृढ निश्चय को अपनाना पड़ेगा। इसके लिए अतिरिक्त शक्ति प्राप्त करने , बाधाओं को दूर करने , सरल रूप में फल प्राप्त करने हेतु ही यंत्र, मंत्र , टोन –टोटके, यज्ञ-पूजा – अनुष्ठान होते हैं। यह कोई आस्था अन्हीं है, बल्कि विज्ञान है। आपके ऊर्जा समीकरण में उद्देश्य के प्रति बाधक घटकों को निकालकर और उसे अतिरिक्त शक्तिशाली बनाकर आध्यात्म के चमत्कारिक फलों की प्राप्ति होती है।

निकम्मों, आलसी, अपना दुखड़ा रोने वालों, अपनी समस्याओं के लिए दूसरों को कोसने वाले, अविश्वासी, संदिग्ध , चालाक लोग आध्यात्मिक शक्ति के चमत्कारिक फलों को प्राप्त नहीं कर सकते। न तो उनका उद्धार देवताओं के गुरु बृहस्पति कर सकते हैं, न ही दानवों के गुरु शुक्राचार्य । ये स्वयं अपने ही मारे लोग होते हैं। अहंकारी , चालाक, सबको ठगकर अपना काम चला लेने की प्रवृति वाले या अपनी अशक्तता पर विश्वास करके निराश आलसी निकम्मे। यह दुनिया ऐसे लोगों के लिए नहीं है। यहाँ पाना है, तो संघर्ष करना होगा, अपनी रक्षा करनी है, तो सक्रियता रखनी होगी। अन्यथा यहाँ यन्त्रणा भोगना निश्चित है। राम को भी लड़ना पड़ा था, कृष्ण ने भी न्याय पूर्ण प्राप्ति के लिए भी संघर्ष का ही रास्ता दिखाया था। हमारे सभी देवी-देवता के हाथो में अस्त्र-शस्त्र होते हैं। ये बताते हैं कि आततायी शत्रुओं , दुष्ट शक्तियों, अपनी समस्याओं से लड़ना ही पड़ेगा। आत्म समर्पण के अतिभावुक सिद्धांत पर विश्वास करने वाले मारे जाते है। फूल चाहे देवता के चरणों में चढाये जाए या गले में पहने जाये, वे असमय ही तोड़ दिए जाते हैं। देवता के चरणों में भी शेर की बलि कोई नहीं चढ़ाता,बकरे-भेड़ काटता है।

 एक बात आवश्यक है । वह यह कि आपकी सभी समस्याओं की जड़ में 70%कारण आपके परिवार और आपके लाइफ स्टाइल पर टिका है। आप मानसिक रूप से निर्मल स्वस्थ नहीं है। केवल समस्याएं ही विचलित नहीं कर रही, उन समस्याओं से लड़ने में परिवार का माहौल बाधक बन रहा है। गलती जिसकी भी हो, पर ऐसा प्रत्येक जगह देखा गया है।

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3 Comments on “आध्यात्मिक मार्ग से सबकुछ बदल सकता है, मगर ……..”

  1. guruji pranam mere ghar me swetark tree hai.abhi karib 8fit ka hai.please inko sidhdh karke sthapit kaise kiya jata hai.iski vidhi aur muhurt.pujan vidhi etc.batane ki mahan kripa kare.

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