अपने बच्चों को नजर या अला-बला से बचाएं

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  1. फिटकरी, मदार के एक फूल को लाल या पीले रंग के कपड़े में ताबीज बनाकर उसे 108 दुर्गा मंत्र ‘ दुं दुर्गाय नमः’ से सिद्ध करके बांध दें या गले या कमर में पहना दें। उसपर नजर या बुरी हवाओं का असर नहीं होगा।
  2. ईग्निशिया बीज (जहरीला पपीता नामक वनस्पति। यह खाने वाला पॉप ककरी नहीं) की माला  भैरव मंत्र ‘ क्रीं क्रीं क्रीं ॐ भैरवाय नमः’ से सिद्ध करके (108) पहनाने से बच्चों या स्त्रियों पर नजर , बाधा या जादू-टोना का प्रभाव नहीं होता।
  3. भैंस, गधा, गाय, बिल्ली , कुत्ता – इनमें से किसी के दाँत या नख के टुकड़े की ताबीज बनाकर भैरव मंत्र से सिद्ध करके गले में पहनने से मिर्गी , नजर या ऊपरी हवा का प्रभाव नहीं होता।
  4. सफेद मदार की जड़ को कपड़े के ताबीज में डालकर ‘ॐ गणेशाय नमः’ मंत्र (108) से सिद्ध करके गले में पहनाने से बच्चों और स्त्रियों की नजर और जादू-टोना से सुरक्षा होती है।

नजर उतारना

  1. किसी को नजर लग गया हो या संदेह हो; तो सफ़ेद या लाल किसी भी मदार की जड़ को पीसकर घी और चिकनी मिट्टी में मिलाकर पेस्ट बनाकर सिर से तलवों तक ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र जपते हुए नीचे की ओर मालिश करें और मिट्टी सूखने पर गर्म पानी से स्नान करवाएं। यह नजर, जादू-टोना तो नष्ट करता ही है; बैक्टीरिया कीटाणु भी नष्ट करता है।  तिन-चार दिन करने से जूँ-लीख भी मर जाते है।  आँखों को बचाकर प्रयोग करें।  (21 जड़ी बूटियों से मिश्रित गंगौट मिले पाउडर को हमारे यहाँ से मंगवाया जा सकता है।  यह झाई, झुर्री, मुहासे, चेहरे की चमक के नष्ट होने , लूज स्किन को भी सही करता है।  250 ग्राम का मूल्या 1500 रु + 100 रु डाक व्यय है)
  2. अपामार्ग को कुछ राई के दाने , हल्दी, धतूरे के फूल के साथ पीसकर सर से पाँव तक उपर्युक्त दुर्गा मंत्र के साथ मालिश करें ।  सूखने पर स्नान करें।  इससे अंदर-बाहर के सारे विषैले विकार निकल जायेंगे।  इसे दो  ग्राम की मात्रा में गर्म पानी से लेना भी चाहिए।  सन्तान प्राप्ति के टोटके
  3. भुनी मछली के साथ ‘ॐ भैरवाय नमः’ मंत्र जपते तीन चिल्लू मदिरा सायंकाल एक महीने तक पान करने से मासिक , लिकोरिया आदि अन्य गर्भाशय विकार दूर होते है और स्वस्थ्य पुत्र या पुत्री की प्राप्ति होती है। पुत्र-पुत्री होना स्त्री-पुरुष के ऊर्जा-बल समीकरण एवम रतिकाल के मानसिक भाव पर निर्भर करता है।
  4. मछली के तेल के साथ , बरगद के कच्चे फलों का सेवन करने से भी उपर्युक्त फल होता है।

किया-कराया के लक्षण

हरदम खोये रहना, भयानक सपने , डर, पैरों से चढ़ती रेंगती झनझनाहट, कोई कुछ बोलता रहता है, आस-पास कोई होता है, एकाएक दौरा, हँसी-चीख-रुदन के साथ, शाप-वरदान देना , प्रवृति (आदतें) बदल जाना , आँखों में चमक , चेहरे पर तमतमाहट और अनावश्यक क्रोध, बात-बात में रोने लगना आदि कई प्रकार के लक्षण होते है ।

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