आप यहाँ हैं
धर्मालय > Posts tagged "मृत्यु"

क्या है यह मायाजाल?

प्रकृति का मायाजाल महर्षि कपिल से लेकर शंकराचार्य ने कहा है कि यह महामायावानी प्रकृति 'परमात्मा' की 'योगमाया' से उत्पन्न एक माया-मारीचिका है। यह मनुष्य को जिस रूप में दिखाई देती है, उस रूप में मच्छर को दिखाई नहीं देती। जिस रूप में यह हाथी को अनुभूत होती है, उस रूप

भोग के नशे में ही ज़िन्दगी बीतती है

बच्चा जन्म लेते ही जिस लुभावने जगत को देखता है, वह क्या है, इसको सोचने की उसे फुर्सत ही नहीं होती। वह उसी समय से कामनाओं में डूब जाता है। पहले उसकी कामना दूध और माता तक ही सीमित रहती है। फिर उसे खिलौने और खाने पीने की चीज़ें लुभाती

जीवन और मृत्यु की विचित्र पहेली

जीव इस संसार में जन्म लेता है, जन्म लेने के बाद एक आकर्षक और मनमोहक जगत को देखता है और उसे भोगने में लग जाता है। जैसे-जैसे वह बड़ा होता है, उसकी अनुभूतियों का दायरा बढ़ता जाता है, इसके साथ ही उसकी भोग की कामना भी बढती जाती है। उसका

Top