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                                                                        संस्थापक का परिचय

नाम : प्रेम कुमार शर्मा (स्वामी प्रेमानंद अलख)

जन्म तिथि : ०३.०३.१९५६  

पिता का नाम : स्व. रामनिरंजन शर्मा ‘अलख’

जन्म भूमि : ग्राम कमतौल , मोहल्ला – कोट, जिला दरभंगा , बिहार

शैक्षणिक योग्यता : हिंदी – दर्शनशास्त्र (एम.ए.)

पेशा : पत्रकार, साहित्यकार एवं सामाजिक-राजनैतिक विश्लेषक

रूचि एवं अन्वेषण : सनातन धर्म एवं उसकी प्राचीन विधाएं

आध्यात्मिक कार्य : सनातन धर्म एवं प्राचीन विद्याओं की साधनाओं एवं ज्ञान के वैज्ञानिक शोध पर 100 से अधिक मूल्यवान ग्रंथों की रचना जो देश विदेश के सभी बुक स्टॉलों पर बिकते रहे हैं।

वर्तमान : भारत की सनातन धर्म विरोधी सरकारों के बर्बाद सिस्टम और यूरोपियन मानसिक गुलामी से भरी युनिवर्सिटियों से इसके रोमांचकारी अद्भुत विज्ञान का मूल्यांकन करवाने हेतु संघर्षरत ताकि यह महाविज्ञान विश्व के वैज्ञानिक पटल पर आ सके।

भारत के अध्यात्मिक जगत में गुरुवर श्री प्रेम कुमार शर्मा एक जाने –पहचाने व्यक्तित्व हैं। इन्होंने 34 वर्ष की कठिन साधना और तपस्या के बबाद भारतीय आध्यात्म के सम्पूर्ण रहस्यों का ज्ञान किया हैं और अपने पुस्तको के माध्यम से इसे आधुनिक वैज्ञानिक जन – जन तक पहुँचाया हैं।
इनका जन्म बिहार के मिथिला क्षेत्र में , महाऋषि गौतम ,कणाद, याझवलक्य की तपस्थली में, कमतौल(कोट); जिला-दरभंगा में हुआ। बचपन से ही ये इस ब्रह्माण्ड के रहस्य को जानने के लिए प्रयत्न शील हुए| सामान्य शिक्षा हिंदी और दर्शनशास्त्र में एम.ए तक प्राप्त की।
आध्यात्मिक विषय पर इनकी 150 से अधिक मूल्यवान पुस्तके प्रकाशित हैं ; जो सारे भारत और विदेशों में बिकती रही हैं और आज भी बिक रही हैं।
इन्होंने अनुभूत किया की मानव समाज में प्रत्येक व्यक्ति को कोई न कोई समस्या हैं और हर व्यक्ति अपनी समस्याओं से परेशान हाल हैं। आश्चर्य इस बात का है कि सभी समस्याओं को दूर करने वाला , चमत्कारिक नुस्खो से भरा एक विशाल विज्ञान इसके पास है ; किन्तु इसके सम्बन्ध में ज्ञान न होने के कारण यह निरर्थक परेशान हो रहा है।

‘धर्मालय’ की स्थापना मुख्य रूप से इसी उदेश्य से की गयी है कि जनमानस इस विज्ञान से परिचित हो; और इसके चमत्कारिक नुस्खो एवं तरीको से अपनी कठिन से कठिन समस्याओं का निदान कर सकें।

‘धर्मालय’ में दिए गये सभी तथ्य , नुस्खे , अध्यात्मिक एवं तांत्रिक चिकित्सा की विधियाँ , धार्मिक सत्य, पूजापाठ की विधियों के रहस्य आदि – पूर्णतया प्रमाणित , परीक्षित और सत्य हैं। इनसे 100% लाभ प्राप्त होता है।

‘धर्म’ की स्थापना के लिए उसके बौद्धिक स्वरुप का ज्ञान होना आवश्यक हैं। ‘धर्म’ का मानवहित में सदुपयोगी होना भी आवश्यक है। गुरुदेव का उदेश्य यही है। धर्म के वैज्ञानिक स्वरुप को बताना और इसका जनहित में उपयोग करने की गुप्त विधियों को बतना। प्राचीन ऋषियों एवं आचार्यों द्वारा रिसर्च किये गये करोड़ो औषधियों, दिव्य-रसायनों,दिव्य-विधियों,गुप्त क्रियाओं को सामने लाना, जिससे सभी अपनी-अपनी समस्याओं को दूर कर सकें।

हम आपको यह बताना चाहते हैं कि गुरु जी बाबा या साधु नहीं हैं। वे सामान्य व्यक्ति की तरह रहते हैं और उनकी उनके जन्म भूमि पर एक कुटी जरूर है; पर उनका कोई आश्रम या सम्प्रदाय नहीं है। न बाबाओं की तरह उनका कोई नेटवर्क है। वे चन्दन, तिलक, माला, गेरुआ वस्त्र धारक भी नहीं है। उनका कहना है कि ये सब साधनाकाल के साधन हैं। मेकअप वे करते है, जो अन्दर से दुर्बल होते है। सनातनधर्म केवल हिन्दुओं का विज्ञान नहीं है। यह मच्छर का भी विज्ञान है और हम अपनी आध्यात्मिक वेशभूषा विश्व की विभिन्न सभ्यताओं पर नहीं लाद सकते। इसकी कोई उपयोगिता भी नहीं है। विज्ञान – विज्ञान होता है, वेशभूषा नहीं।

सात दिव्य सन्यासियों द्वारा अभिषेक किये गये, शिवावतार गुरुदेव प्रेम कुमार शर्मा स्वामी प्रेमानंद ‘अलख’ कई तपस्वियों, साधुओं, अघोरियों, महाकाल के पूजकों, देवी साधकों, विष्णु के अनन्य रूपों की साधना करने वाले वैष्णव साधकों के गुरु हैं; जो सांसारिक जीवन में नहीं हैं। जंगलों-गुफाओं में तपस्या करते हैं। सामान्य गृहस्थ साधकों की संख्या बृहत है; पर ये किसी तरह का समुदाय नहीं चलाते। इनका कहना हैं कि सभी सम्प्रदायों की जड़ में सनातन धर्म का सनातन विज्ञान है। जो इस विज्ञान को जान लेता है, वह किसी धर्म या साम्प्रादाय या मार्ग का हो; चाहे उसका ईष्ट कोई भी हो, चाहे मंत्र कोई भी हो; उद्देश्य कुछ भी हो; सफलता निश्चित मिलती है। इसीलिए परस्पर विरोधी मार्ग के साधक भी गुरुदेव से ज्ञान प्राप्त करके अपनी साधनाओं में सफलता प्राप्त कर रहे हैं।

गुरूजी का व्यक्तित्व खुले पन्ने की तरह है। कोई छल, प्रपंच, पाखंड नहीं। कोई पर्दा नहीं। नियमों की कट्टरता को संस्कार बंधन का पाश मानने वाले गुरु जी किसी प्रकार के ढोंग में विश्वास नहीं रखते।

परिचय

नाम- प्रेम कुमार शर्मा, पिता का नाम – स्व. रामनिरंजन शर्मा ‘अलख’ , दादा का नाम –स्व. रामलोचन ठाकुर, गोत्र – भारद्वाज, जाति भूमिहार ब्राह्मण , कुल परिचय- स्थानीय जमीन्दार कुल।

शिक्षा – माध्यमिक विद्यालय, हीरो पट्टी , मधुबनी (तात्कालिक दरभंगा)। उच्च विद्यालय – जे. ए. उच्च माध्यमिक विद्यालय कमतौल। बी.ए. हिंदी आनर्स एवं दर्शन – मारवाड़ी महाविद्यालय , दरभंगा। एम.ए. हिंदी। – ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा।

आई.डी रिकॉर्ड बर्थ डेट 3.3.1956 ।

मूल पता एवं जन्म स्थान – मुहल्ला – कोट, ग्राम- कमतौल, थाना-कमतौल, पोस्ट-कमतौल, रेलवे स्टेशन – कमतौल (वाया दरभंगा), जिला- दरभंगा बिहार।

1977 से 1983 तक दो राष्ट्रीय स्तर की बड़े सर्कुलेशन वाली पत्रिकाओं का रिकार्डेड संपादक – 1983 से 90 तक आध्यात्मिक खोज में भ्रमण – 1990 से 95 तक फिर पत्रकारिता और पुस्तक लेखन – 1995 से अब तक आध्यात्मिक साधना – प्राचीन विद्याओं पर शोध और इन्ही विषयों पर अपनी रिसर्च बुकों का लेखन – इसकी आमदनी से जीविकोपार्जन ।

किसी प्रकार की परम्परागत साधु, बाबा, पुरोहित की वेशभूषा और व्यवहार से रिक्त ।

 

8 thoughts on “संस्थापक का परिचय

    1. धन्यवाद नीलमणि जी !!! कृपया अन्य पोस्ट को भी पढ़िए …

  1. swami premanand alakh ji ! aap dhanya hai ! aur aap ka uddeshya param kalyankari hai! aap ke is satya gyan sadhan se sachche hindu dharm ki pratisthapana hogi ! aur purnatah bhatke hue dharm gyanionko sahi disha mil jayegi !
    aap ke is karya me hum aap ke saath hai ! aap ko kisi bhi prakar ki sahayata karne me hum apne aap ko param bhagyashali samzenge !
    aap ke dwara is samaj ka kalyan ho !
    alakh,,,,,,,,,aadesh ! namo aadesh !

  2. Very useful information available on this site and if the words written about him are true, Gurudev he has such a great personality. Namah Shivay ji

  3. read about your work and your self
    my mind says to plan a visit and to stay forw few …time…not hours as you have no samay ka bandhan
    pl send me some details-how to be at your town-i am at ahmedabad-gujarat-pl guide-by train to which point-which route then by taxi or bus…whatso ever
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    rgds
    jay mata kee..jay mata kee
    dinesh k jani
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    my cell numbers are not active as were kept in custody due to my visit to scotland-i returned on 24th may-needs yr guidance.thanks pranaam

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