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वशीकरण विद्या सिद्धि [ क्रमांक २]

[गतांक से आगे ] स्नान ===नहा धो कर पूजित यंत्र और आसन पर बैठने से पहले फिर दिशा ,आसन ,कमरे को मूल मन्त्र से सुरक्षित कर लें . वस्त्र ===लाल,बिना सिला या ढीला चंदन ===रक्त चन्दन आवाहन ===देवी के रूप ध्यान को मानस में ला कर स्वयं को देवी रूप कल्पित करें . ह्रदय

तप,साधना का गोपनीय रहस्य

तप और साधना पर जाने कितने  विद्वता भरे वक्तव्य आते रहते है .बहुत से धमॆगुरू इसके लाभ पर व्याख्यान देते रहते हैं ,पर कहीं यह स्पष्ट नहीं है कि यह है क्या?  जब समझ में नआये कि यह है क्या आप इसका लाभ कैसे उठा सकते हैं?जहाँ तक गुरुओं की

कामकला काली की गुप्त साधना (2)

कामकलाकाली की साधना का समय रात के 9 से 1 है. इसे 14 कृष्णपक्छ में पूजा करके प्रार‌म्भ करना चाहिये . पूजाविधि --आसन,वस्त्र, स्थान ,दिशा आदि की शुद्धि करें.शास्त्रीय स्तर पर सबके मंत्र अलग हैं ,पर इसका सरल तरीका यह है,कि 21 मूल मंत्र से जल को सिद्ध करके ,इसी मंत्र

कैसे काम करता है हमारा उजाॆ चक्र ?

सिद्धि साधनाओं के लिये जानना जरूरी है कि सामान्य जीवन में हमारा उजाॆ चक्र कैसे काम करता है .? सिद्धियों के लिये कोई अलग से क्रियात्मकता नहीं होती . अनाहत ,जिससे हमारा हृदय विकसित होता है ,हमारे शरीर का सूयॆ है .इसे जीवात्मा भी कहा जाता है .आत्मा इसके केन्द्र में

कागज पर प्रिन्टेड यंत्र काम नहीं करते .

यंत्र केवल नक्शा नहीं होते.उसमें समय, काल ,लिखने के द्रव्य ,कलम ,के साथ साथ सिद्ध करने वाले व्यक्ति की मंत्रोच्चारण छमता का मह्त्व होता है .इस सम्बन्ध में dharmalay.com  पर सभी रहस्य बताये गये हैं .कागज के प्रिन्टेड यंत्रों का उदेश्य केवल यंत्र की संरचना को स्प्ष्ट करना होता है

भगमालिनी साधना विधि( क्रमांक २)

वस्त्र-- लाल, आसन-- लाल कम्बल या रेशम, माला  -- रुद्राक्छ प्रशस्त है . न्यास. -- ह्री श्रीं के साथ ऐं से हृदय, फिर अगले मंत्र शब्दों से षडंग न्यास करना चाहिये .कर न्यास में भी अंगूठे से यही क्रम होगा . यंत्र-- दो ऱेखाओं वाला या मोटा चतुरस्त्र.इसमें पंचदल कमल .कमल के

भगमालिनी सिद्धि की गुप्त तांत्रिक विधियाँ

भगमालिनी श्रीविद्या के ललितामागे सहित कई मागोे मे नित्या के रूप में प्रतिष्ठित है .यह योनि नित्या है,  प्राचीन भैरवी चक्र (उध्वेनाम्नाय शैवमागे) की योनि शक्ति है .इसे आद्याशक्ति का एक रूप माना गया है .कहीं कहीं इसे ही आद्या कहा गया है .एक ही बात है, जो नामों से

अप्सरा की गुप्त साधनायें (विधि)

शुक्ल पंचमी से कालरात्री में एकान्त कमरे मे यंत्र स्थापित करके धूप दीप दिखा कर पूजा करें और यथा स्म्भव निधाेरित संख्या में जप करें .जप संख्या २५००० है . यंत्र --विन्दुवृत,वृत, अधोमुखी त्रिकोण,दो रेखाओं वाला वृतषष्टदल कमल ,षटकोण ,वृत,अष्टकोण ,वृत,अष्टदल कमल,चतुरस्त्र. लालरंग में चमेली, गुलाब ,अनार, दालचीनी, कपूर ,मिला कर

यक्षिणी की अति गुप्त साधनायें (विधि)

यक्षिणी साधना विधि यक्छिणी के कई भेद हैं. यहाँ हम उस विधि को दे रहे हैं, जिसके द्वारा मंत्र और ध्यान रूप बदल कर किसी को भी सिद्ध किया जा सकता है . यह शमशान की देवी है ़अत : इसकी साधना का शास्त्रीय स्थल श्मसान है .बरगद का बृक्छ इसका दूसरा शास्त्रीय

दुगाे जी की श्मशान साधना

तिथि --सामान्य साधना के अनुसार . वस्त्र आदि तदानुसार . हवन सामग्री कबूतर या परवा का माँस,  गूलर की लकड़ी. चक्र --गोपनीय .इसे जानने के लिए पात्रता आावश्यक है.यह सामान्य साधना नहीं है .पात्रता केसाथ यह चक्र व्यक्ति विशेष के अनुसार गणित किया जाता है और विशेष निदेश भी होते हैं, इसलिए यह

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