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परमात्मा से हम क्या प्राप्त कर सकते हैं ?

परमात्मा से आप क्या प्राप्त कर रहे हैं? सिर के चाँद से हो कर वह परमात्मा ही शरीर में अमृत पम्प करता है, जिससे सभी का जीवन है और साँसे चलती है । उसकी यह व्यवस्था परमाणु से लेकर ब्रह्माण्ड तक में व्याप्त है। बच्चों के सिर में , जब

विराट रूप वैश्म्पायर

श्री कृष्ण ने अर्जुन को जिस विराट रूप का दर्शन कराया था, वह यही ब्रह्माण्ड है। इसमें प्रतिक्षण जीवन-मृत्यु का तांडव चलता रहता है। वैदिक ऋषियों ने इसे ‘महामाया’ कहा है; क्योंकि यह विचित्र पॉवर सर्किट परमात्मा तत्त्व(मूलतत्व) की धारों से बना हुआ एक चक्रवात मात्र है। इसमें कोई नया

चमत्कारिक सिद्धियाँ और उनके रहस्य

इस प्रकृति में चमत्कार नहीं होते। जो भी होता है , शाश्वत नियमों के अधीन ही होता है । इन नियमों के विरुद्ध परमात्मा भी किसी को कुछ नहीं दे सकता। वास्तव में आधुनिक विश्व तत्वविज्ञान के बारे में कुछ नहीं जानता और इस कारण से इसके नियमों के

कैलाश का रहस्य

प्रत्येक इकाई के शीर्ष को कैलाश कहा जाता है। हमारी खोपड़ी का शीर्ष कैलाश है और चाँद मानसरोवर। इस मान-सरोवर के मध्य में एक छेड़ होता है। यहाँ बिंदु रुपी ऊर्जा गिरती रहती है , जो सती है और इसके ह्रदय यानी केंद्र में सदाशिव यानी ‘0’ विधमान होता है।यह

ॐ का रहस्य

यह हमारी खोपड़ी की ऊर्जात्मक संरचना का एक बाहरी ब्लूप्रिंट है। अपने सिर का अध्ययन कीजिये। पीछे की तरफ दोनों सिरों के मिलने से एक गाँठ होती है। आगे जो पूंछ दिखाई गयी है, वह हमारी नाक है। इससे 12 अंगुल यानी 9 आगे तक ऊर्जाधारा (श्वाँस नहीं ) निकलती

स्वस्तिक का रहस्य

सनातन धर्म के प्रतीक के रूप में देखे जाने वाले स्वस्तिक चिन्ह का क्या महत्व है? क्या है इस चिन्ह का रहस्य? स्वस्तिक चिन्ह में कौन सा रहस्य छुपा है? क्या इसको बनाने से कोई लाभ है? स्वस्तिक को इतना शुभ क्यों माना जाता है? जानिए इसके विज्ञान को. स्वस्तिक ब्रह्माण्ड

मंदिर का रहस्य

तत्त्व विज्ञान के सूत्रों पर धरती की ऊर्जा-तरंगों को शंक्वाकार करके धनीभूत करने से, प्रतिक्रिया में इसके ऊपर विपरीत उर्जा प्रकट होती है ; जो उल्टी होती है। इसका त्रिशूल निचे होता है। यह ऊर्जा धन (+) होती है; इसीलिए बन बन कर मंदिर में गिरने लगती है और नीचे

शेषनाग का रहस्य

हजारों फणों और हजारों पूंछों वाले शेषनाग को देखना हो, तो किसी पेड़ को देखिये। इसके पत्ते फण है, जिनसे लगातार फुफकार (श्वाँस ) निकल रही है और कमर पर अनेक शाखायें है। एक पूंछ नीचे चली जाती है, जिनके अंत में हजारों पतली पूंछे होती है। मनुष्य या जंतुओं में

0 से 9 अंकों की उत्पत्ति का रहस्य

उपर्युक्त प्रक्रिया द्वारा 0 से 9 पॉवर-प्वाइन्टो की उत्पत्ति होती है, जिनसे 9 प्रकार की प्रमुख उर्जा- तरंगों की उत्पत्ति होती है। ये 9 के बाद पुनः क्रम से उत्पन्न होते है और नयी इकाई बनाते है। इस प्रकार 0 से 9 तक अंकों से जिस प्रकार अनन्त सांखिकी का

नवशक्ति का रहस्य

यह पाँच बिन्दुओंवाला परमाणु लगातार विकास करता है। यह विकास ‘0’ को खींचकर करता है। इसकी धूरी पर सभी के बिच में एक-एक यानी चार ऊर्जा बिंदु और उत्पन्न हो जाता है। अब इन नौ बिन्दुओं से नौ प्रकार की ऊर्जा तरंगों का उत्सर्जन होने लगता है। यही सनातन धर्म के

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