आप यहाँ हैं
धर्मालय > धर्म का ज्ञान क्षेत्र

क्या है सनातन धर्म?

सनातन का अर्थ है, शाश्वत। जो सदा है, सदा रहेगा और जब हम इस सत्य के मानक पर विचार करेंगे, कोई मनुष्य निर्मित आचार संहिता या पूजा इबादत की व्यवस्था इसमें नहीं आएगी। भला एक नश्वर मनुष्य शाश्वत नियमों की उत्पत्ति किस प्रकार कर सकता है? इसका उत्तर रामायण महाभारत या

शिवलिंग क्या है?

जब ब्रह्म विद्या को समझते नहीं तो तोता मार्का शास्त्र ज्ञान को प्रदर्शित मत करो। यह युग शास्त्र प्रमाण का नहीं प्रत्यक्ष प्रमाण का है। तीन तांबे के ईयर फोन में कान की ओर लगे वायर जितने मोटे तार को ऐंठ कर रस्सी जैसा बनाओ। इन तारों से नीचे से लपेट

सत्संग ज्ञानगंगा

धर्मालय द्वारा चलाये जा रहे , इस सत्संग में कोई भी भाग ले सकता है। आप अपनी कोई भी धार्मिक पारिवारिक या आध्यात्मिक शंका पर प्रश्न पूछ सकते है । गुरुवर श्री प्रेम कुमार शर्मा आपके प्रश्नों के देंगे। आपका परिचय नहीं दिया जायेगा , आप अपना नाम पता या

मत्स्यावतार का रहस्य

पुराणों में एक अन्य अवतार की भी कथा है। मत्स्यावतार की। जब पृथ्वी जल में समाई जा रही थी, तब विष्णु ने मत्स्यावतार का रूप धारण करके इसकी रक्षा की। किसी चुम्बक के आयताकार लम्बे डंडे की बल- रेखाओं को देखिये। यह मछली नहीं है? जानते हैं, यह मछली कैसे बनती

श्री कृष्ण का दर्शन

‘श्री कृष्ण’ का चित्रण राम से सर्वथा विपरीत रहा है, पर दोनों में एक बात समान रही है। धर्म और न्याय की स्थापना का प्रयत्न। दोनों के मार्ग एवं पद्धतियों में अंतर है , पर यह युगधर्म के अनुरूप था। महाभारतकाल में प्रपंच और दुराचार का बोलबाला था। इस काल

राम कहाँ है?

आपके हृदय में जो नाभिक (जीवात्मा) है, उसके अंदर जो ‘आत्मा’ (प्रथम परमाणु संरचना) बैठी हुई है , उसका सीधा सम्बन्ध ‘राम’से हैं। इस बात से कोई अन्तर नहीं पड़ता कि आप इसे किस नाम से पुकारते है। इस पर किसी धर्म , सम्प्रदाय , नस्ल या ग्रह आदि का

क्या स्वर्ग नर्क होते हैं ?

इस प्रश्न का उत्तर हम पहले दे चुके हैं। आपको इसके लिए जीव का विज्ञान समझना होगा। जिसे हम आत्मा कहते है, वह एक नन्हा परमाणु है। हमारी गणना के अनुसार प्रकाश कण से 108(पॉवर 81)  गुणा सूक्ष्म इसका भी आंतरिक पॉवर स्ट्रक्चर है। इसमें सारी संरचना शरीर जैसी होती

क्या स्वर्ग नर्क होता है ?

क्या स्वर्ग होता है? नर्क क्या होता है? क्या ये सब सिर्फ मिथक हैं? या यह वास्तव में होते हैं? यदि हाँ! तो कहाँ होता है स्वर्ग लोग या नर्क लोक? मृत्यु के बाद क्या होता है? स्वर्ग होता कैसा है? क्या इन मिथकों में कुछ सच है? इस बात के कुछ

शिव कौन हैं ?

सदाशिव=  एक अनंत तक फैला सारतत्व है .यह सांसारिक यानि भौतिक तत्व नहीं है .यह अनंत तक व्याप्त वह सार तत्व है ;जिसमें यह ब्रह्मांड एक चक्रवात की तरह उत्पन्न होता है.जैसे चक्रवात में नया कुछ उत्पन्न नहीं होता ,उसी प्रकार इस सदाशिव की धाराएँ ही ब्रहमांड को उत्पन्न करतीं

मोक्ष क्या है ? मोक्ष का मार्ग क्या है ?[ क्रमांक २]

[गतांक से आगे ] आत्मा रुपी कण, जो एक सूक्ष्म परमाणु है, ९+९९ पावर प्वाइंट से युक्त होता हैं. इसमें केवल एक, इसका नाभिक न्यूट्रल होता है और एक शीर्ष का विन्दु. शेष सापेक्ष रूप से + एवं - वर्ग में बंटे होते हैं. जब ये ब्रहमांड के नाभिक से उत्सर्जित होते

Top