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धर्मालय > ज्योतिष विद्या (Page 2)

आपकी समस्या का कारण और निदान

  प्रेम सफल होगा या नहीं? विवाह कब होगा? व्यवसाय में हानि और असफलता क्यों? नौकरी कब लगेगी? प्रेमिका या प्रेमी से संयोग बनेगा या वियोग? क्या विवाह होगा? होगा तो सुखमय होगा या कष्टमय? जीवन साथी विश्वसनीय है या अविश्वसनीय ? कहीं दो के मध्य कोई तीसरा तो नहीं?

ज्योतिष फल गणना में वर्ण, वर्ग और योनि का महत्व

सामान्यतया फल गणना में ज्योतिषी एक ही विधा को पकड़ कर बैठ जाते हैं, एक मेथड की कट्टरता कई अन्य बातों से वंचित कर देती हैं, जो जानी जा सकती थी. आध्यात्मिक क्षेत्र की यह बड़ी समस्या है. जो और जितना उसके गुरु ने बताया है, उससे अधिक पर विचार

राहु – केतु का रहस्य

प्रश्न - राहु-केतु क्या है? क्या ये सच के ग्रह हैं? विज्ञान से प्रमाणित है कि इस नाम की कोई शक्ति या कोई ग्रह नहीं होते। सूर्य ग्रहण चन्द्रमा के बीच में आ जाने से होता है और चन्द्र ग्रहण पृथ्वी के बीच में आने से। फिर यह हमारे जीवन को

मंत्र परीक्षा के सूत्र और शास्त्रीय चक्र

आजकल साधना सिद्धियों में भी भेड़ियाघसान हो गया है। आजकल के गुरु ऐसे हैं कि शिष्य चरणों में हाजिर हुआ, कुछ सेवा सत्कार किया, अपनी इच्छा बताई और गुरु ने कान में मंत्र फूंका , सिर पर हाथ रखा और हो गयी मंत्र दीक्षा। ऐसे में बहुत से गुरु हथेलियों

वास्तु विद्या क्या है?

वास्तु विद्या क्या है? क्या यह सत्य में मनुष्य पर प्रभाव डालता है? वह भी उसके भाग्य पर? उत्तर – ‘ वास्तु विद्या’ का शाब्दिक अर्थ निकालिए। इसका अर्थ वस्तु का विज्ञान है , न कि मकानों की विद्या। यह प्राचीन पदार्थ विज्ञान है । चूँकि मकानों में इस विद्या का

आपके प्रश्न हमारे उत्तर

प्रश्न – केतु नामक कोई ग्रह नहीं है; फिर यह हम पर प्रभाव कैसे डालता है? उत्तर – ज्योतिष के ग्रहों के सम्बन्ध में के भारी भ्रम है कि यह सौर मंडल के ग्रहों से सम्बन्धित है; परन्तु यह हमारी या किसी इकाई की ऊर्जा – व्यवस्था से सम्बन्धित है। इन

स्त्री जातक : विवाह न होने के कुंडली योग (शास्त्रीय) (उपाय सहित)

क्रमांक – 10 से आगे – (शत्रु – पाप- मित्र-क्रूर आदि के लिए शुरू के विवरण वेबसाइट पर देखें) उपाय के लिए लक्षणों से स्वयं करें ग्रह का उपाय देखें। सातवें भाव में बुध-शुक्र हों, पहले तीसरे , 11 वें खाने में पापी ग्रह हों या बुध-शुक्र के शत्रु हों।

स्त्री जातिका की जन्मकुंडली के संक्षिप्त फल (ऊपाय सहित)

यहाँ दिए गये समीकरण और उनका फल शास्त्रीय कथनों पर आधारित हैं। अपनी कुंडली में अपने जीवन की जानकारी लेते समय यह ध्यान रखें कि आपका फल सम्पूर्ण कुंडली की गणना का फल नहीं है। शुभ या अशुभ परिणाम में बचाव या हानि प्रभाव कम-अधिक-बचने के योग्य हो सकता है। फल

ग्रहों की मित्रता – शत्रुता

मित्र - सूर्य के मित्र – वृ. मं चन्द्र चंद्रमा के मित्र – सूर्य बुध मंगल के मित्र – सू. च. वृ. बुध के मित्र – सूर्य, शुक्र, राहु, बृहस्पति के मित्र – सू. च. मं शुक्र के मित्र – श. बु. के. शनि के मित्र

अपना सामान्य फल देखने के लिए क्या करें?

अपना भाग्य स्वयं जानने के कुछ  सरल तरीके. केवल कुछ सामान्य सूत्रों को समझकर आगे राशि-ग्रह के अलग अलग फलों को पढ़कर समरी बना लें। समरी का सूत्र निम्नलिखित होगा। किसी भाव (खाना) के विषय को पूर्व के विवरण से समझ लें। ये संक्षिप्त विवरण है। इनमें केवल सब्जेक्ट का नाम है,

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