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धर्मालय > माला, वस्त्र एवं पूजन सामग्री

क्या किसी माला की सिद्धि मंत्र जपने से होती है?

भारी भ्रम है यह। जब भी हम इसकी शास्त्रीय विधियों को देखेंगे, उनकी प्रकिया होती है। मन्त्र जप साथ चलता है, पर उस प्रक्रिया में जो कुछ होता है, उस पर किसी का ध्यान नहीं होता। मंत्र की शक्ति तो होती ही हैं, पर यहाँ विधि प्रकिया का महत्त्व अधिक

क्या कई गुरु हो सकते है? क्या गुरु के बदलने से ‘दोष’ लगता है? किस देवी-देवता के लिए कौन सी माला प्रयोग करनी चाहिए?

एक ही साधना या विषय के लिए एक ही समय काल में कई गुरु नहीं हो सकते| ऐसा करने पर वह सिद्धि नहीं प्राप्त होती है| यह व्यवहारिक बात है| आपको बिजली बनानी है और तीन गुरु है| एक कोयले से बिजली बनाने की विधि बता रहा है, एक डीजल

तिलक से सम्बन्धित विशेष निर्देश

  विष्णु भक्त के लिए चन्दन, गोरोचन और केसर आदि का तिलक उचित है | शैव भक्त के लिए श्वेत चन्दन, काष्ठ चन्दन, बेल की जड़ को घिसकर लगाना उचित है | काली के रक्त, रक्तचंदन, रोली, रक्तिम गुंजा आदि तामसी भाव वाला चन्दन उपयुक्त है | रुद्र के लिए श्वेत चन्दन. सिन्दूर चन्दन

माला की संक्षिप्त सारिणी

शिव      - रुद्राक्ष, बेल, गाय के गोबर, चांदी के दाने, लकड़ी के चन्दन, श्वेत चन्दन आदि | पार्वती     -   रुद्राक्ष, बेल, गाय के गोबर, चांदी के दाने, लकड़ी के चन्दन, श्वेत चन्दन आदि | रूद्र       - रुद्राक्ष, श्वेतार्क की जड़, रक्त चन्दन, चांदी मिश्रित तांबे के दाने आदि | गणेशजी   - श्वेतार्क की

माला का सूत्र

माला का सूत्र भी ऊर्जात्मक समानता पर आधारित है | किसी शक्ति का मंत्र जाप कर रहे हैं, तो उस शक्ति की प्रिय वस्तु की माला बनायें | विष्णु को तुलसी पसंद हैं, तो उनके मंत्र हेतु तुलसी की माला बनेगी | परन्तु इसका यह अर्थ नहीं है कि हम केवल

माला, यंत्र, वस्त्र एवं पूजन सामग्री

माला का उपयोग कंठ में पहनने या यन्त्र जाप करने के लिए होता है | दाहिने हाथ की उंगलियों से निकलने वाली तरंगों की टकराहट जब माला के दानों से होती हैं, तो यहां ऊर्जा स्फुलिंग होती है | इसके प्रभाव को उत्पन्न करने के लिए ही माला को मंत्र

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