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परमात्मा से हम क्या प्राप्त कर सकते हैं ?

परमात्मा से आप क्या प्राप्त कर रहे हैं? सिर के चाँद से हो कर वह परमात्मा ही शरीर में अमृत पम्प करता है, जिससे सभी का जीवन है और साँसे चलती है । उसकी यह व्यवस्था परमाणु से लेकर ब्रह्माण्ड तक में व्याप्त है। बच्चों के सिर में , जब

विराट रूप वैश्म्पायर

श्री कृष्ण ने अर्जुन को जिस विराट रूप का दर्शन कराया था, वह यही ब्रह्माण्ड है। इसमें प्रतिक्षण जीवन-मृत्यु का तांडव चलता रहता है। वैदिक ऋषियों ने इसे ‘महामाया’ कहा है; क्योंकि यह विचित्र पॉवर सर्किट परमात्मा तत्त्व(मूलतत्व) की धारों से बना हुआ एक चक्रवात मात्र है। इसमें कोई नया

कैलाश मानसरोवर का रहस्य

क्या हमारे शरीर में भी कैलाश मानसरोवर स्थित है? यदि हाँ तो हमारे शरीर में कैलाश मानसरोवर कहाँ है? कैलाश पर्वत और मानसरोवर का आध्यात्मिक रहस्य क्या है? क्या कैलाश मानसरोवर की कहानी में कोई आध्यात्मिक रहस्य व्याप्त है? आखिर क्या है वास्तविक कैलाश मानसरोवर का रहस्य? कैलाश मानसरोवर का आध्यात्मिक

ॐ का रहस्य

हर मन्त्र में प्रयुक्त होने वाले ॐ का रहस्य क्या है? क्या ॐ की शक्ति से ही मन्त्र की शक्ति है? या इसके पीछे कोई आध्यात्मिक सत्य है? क्या ॐ का चिन्ह किसी संरचना को व्यक्त कर रहा है? ॐ का उच्चारण और ॐ का जप करने से क्या हमें

स्वस्तिक का रहस्य

सनातन धर्म के प्रतीक के रूप में देखे जाने वाले स्वास्तिक चिन्ह का क्या महत्व है? क्या है स्वस्तिक का रहस्य? स्वस्तिक चिन्ह में कौन सा आध्यात्मिक ज्ञान छुपा है? क्या इसे बनाने से कोई लाभ है? स्वस्तिक को इतना शुभ क्यों माना जाता है? जानिए इसके स्वस्तिक का विज्ञान

मंदिर का रहस्य

तत्त्व विज्ञान के सूत्रों पर धरती की ऊर्जा-तरंगों को शंक्वाकार करके धनीभूत करने से, प्रतिक्रिया में इसके ऊपर विपरीत उर्जा प्रकट होती है ; जो उल्टी होती है। इसका त्रिशूल निचे होता है। यह ऊर्जा धन (+) होती है; इसीलिए बन बन कर मंदिर में गिरने लगती है और नीचे

शेषनाग का रहस्य

हजारों फणों और हजारों पूंछों वाले शेषनाग को देखना हो, तो किसी पेड़ को देखिये। इसके पत्ते फण है, जिनसे लगातार फुफकार (श्वाँस ) निकल रही है और कमर पर अनेक शाखायें है। एक पूंछ नीचे चली जाती है, जिनके अंत में हजारों पतली पूंछे होती है। मनुष्य या जंतुओं में

0 से 9 अंकों की उत्पत्ति का रहस्य

उपर्युक्त प्रक्रिया द्वारा 0 से 9 पॉवर-प्वाइन्टो की उत्पत्ति होती है, जिनसे 9 प्रकार की प्रमुख उर्जा- तरंगों की उत्पत्ति होती है। ये 9 के बाद पुनः क्रम से उत्पन्न होते है और नयी इकाई बनाते है। इस प्रकार 0 से 9 तक अंकों से जिस प्रकार अनन्त सांखिकी का

नवशक्ति का रहस्य

यह पाँच बिन्दुओंवाला परमाणु लगातार विकास करता है। यह विकास ‘0’ को खींचकर करता है। इसकी धूरी पर सभी के बिच में एक-एक यानी चार ऊर्जा बिंदु और उत्पन्न हो जाता है। अब इन नौ बिन्दुओं से नौ प्रकार की ऊर्जा तरंगों का उत्सर्जन होने लगता है। यही सनातन धर्म के

पंचतत्व का रहस्य

यही नन्हा सा परमाणु जो एक अनुमानित गणना के अनुसार प्रकाश से 108 (81 *3 ) गुणा सूक्ष्म होता है; वह लगातार ‘0’ को खिंच – खीच कर अपना विस्तार करता हुआ , धुरी पर दो और ऊर्जा बिन्दुओं को उत्पादित करने लगता है। अब इसमें पाँच बिंदु हो जाते

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