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यक्षिणी के सिद्ध यंत्र और साधना विधि

यक्षिणी भाव आधारित देवियों के एक समूह का नाम है। साधक को मनोवांछित फल प्रदान करने में सक्षम ये देवियाँ शीघ्र सिद्ध हो जाती है; इसलिए भोग प्रधान देवियों में इनका स्थान सर्वोपरि है। हमारे बहुत से श्रद्धालु इनकी साधना करना चाहते है। जैसा कि हम पहले स्पष्ट कर चुके

दीपावली की महाकाल रात्रि में सिद्ध किये गये यंत्र

धनतेरस की रात से अमावस्या कार्तिक की अर्द्ध रात्रि तक रात में विशेष प्रकार के मन्त्रों से सिद्ध पूजन यंत्र मंगवा कर नित्य साधारण पूजा करके अपने घर – परिवार , व्यवसायिक केंद्र, ऑफिस एवं दूकान में लगाकर अपनी आर्थिक समस्याओं एवं विघ्न बाधाओं को दूर करें। १००% प्रभावशाली और चमत्कारिक

प्रश्नोत्तर – अपना रक्षा – कवच बनवाने के लिए क्या करें?

प्रश्नोत्तर – अपना रक्षा – कवच बनवाने के लिए क्या करें? जब किसी किले की रक्षा के बारें में सोचा जाता है; तो यह देखा जाता है कि उसका कौन सा हिस्सा कमजोर है और कमजोरी क्या है? उसके अनुसार ही उसकी रक्षा का इन्तेजाम किया जाता है । ‘धर्मालय’ इसी

धारण करने वाले यंत्रों के ताबीज

पूजन करने वाले यंत्रो में उनकी पूजा करनी होती है। वे उसी के लिए बने होते है। उन्ही यंत्रों पर मन्त्र भी सिद्ध किये जाते है। धारण कारने वाले इन यंत्रों को कपड़े के ताबीज में भरकर कमर, गले या बांह में बाँधा जाता है। इनमें पूजा करने की आवश्यकता नहीं

कैसे काम करते है यंत्र और ताबीज

इसको समझने के लिए हमें इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों को देखना होगा। अभी के सर्किटों की बात हम बाद में करेंगे। पूर्व के युग में जो रेडियो-ट्रांजिस्टर बनते थे; उसके कुछ पार्टों पर नजर डालें।आइ. एफ. में क्या होता था? एक तार का निश्चित लपेटा और उसके मध्य में कार्बन कैप, जिसे

विशेष शक्तिदायक गोपनीय यंत्र और मूर्तियाँ

(इनमें से कोई यंत्र या सिद्ध मूर्ति व्यक्ति विशेष के लिए जमा कराने पर सिद्ध किया जाता है) पारद की सिद्ध की हुई गणेश जी की छोटी मूर्ति     - 2500 रु पारद का सिद्ध किया हुआ शिवलिंग                    – 2500 रु. सिद्ध धनदा स्वस्तिक यंत्र (धातु)                     -     600 रु. सिद्ध मनोकामना

चमत्कारिक सिद्ध एवं प्राण प्रतिष्ठित यंत्र, ताबीज एवं गंडे

महाकाल भैरव धातु यंत्र – (यह यंत्र भवन, कार्यालय, दूकान, कक्षों, खेतों, तिजोरी, बागों के वृक्षों पर लगाने से; वहां की सभी बुरी शक्तियां भाग जाती है और उस स्थान की बुरी शक्तियों एवं बुरी नजरों से रक्षा होती है) - सिद्ध एवं प्राण प्रतिष्ठित श्री यंत्र – (

ग्रह दोष निवारण यंत्र और ताबीज

ये सभी गोपनीय तांत्रिक मन्त्रों से सिद्ध किये गये हैं और धर्मालय द्वारा बताई गयी विधि से इनका उपयोग करने पर इन ग्रहों की शक्ति चमत्कारिक रूप से बढती है. सभी यंत्र मन्त्रों द्वारा पूजित, प्राण प्रतिष्ठित, चार्ट पेपर पर हस्त निर्मित और सुनहले फ्रेम में मण्डित होते हैं. इन सभी यंत्रो का

मालाओं का रहस्य

सबसे श्रेष्ठ माला वर्णमाला है; जिसे शिव्सार (अनुस्वार) से संयुक्त करके शक्ति बीजों की उत्पत्ति होती है।इसके बाद महा शंख और इसके बाद स्फटिक की माला श्रेष्ठ समझी जाती है। रुद्राक्ष की माला सभी कर्मों में प्रशस्त है।मूंगा, हीरा, मणि की माला पुष्टि (चिकित्सा) एवं वशीकरण में उपयुक्त मानी जाती

हवन द्वारा मनोकामना पूर्ती

लक्ष्मी के बीज मन्त्र ‘श्रीं’ के साथ प्रारंभ में प्रणव ‘ॐ’ और ;ह्रीं’ लगाकर ‘क्लीं’ और इसके बाद ‘फट स्वाहा’ यानी ‘ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं फट स्वाहा’ मन्त्र से घी मिश्रित कमल या खीर से एक हजार हवन करता है; वह अतुल धन की प्राप्ति करता है। (आम की समिधा)इसी

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