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धर्मालय के सिद्ध गोपनीय तांत्रिक यंत्र [ह्स्थनिर्मित १०”/९”लैमिनेटेड फ्रेम और मन्त्र सिद्ध ]

ये सभी यंत्र विधिवत लिखे और सिद्ध किये हुए होते हैं . ये तंत्र के गोपनीय पूजन यंत्र और विशेष अनुरोध पर निर्मित किये जाते हैं .इनके साथ यंत्र के देवी या देवता का एक मन्त्र और उसके सिद्ध करने की विधि भी भेजी जाती है .वैसे इस पर उस

घर-गृहस्थी के अदभुत चमत्कारी टोटके

प्रत्येक घर और व्यक्ति के जीवन में सांसारिक बिघ्न बाधाएं और उलझनें होती हैं. यहाँ कुछ अत्यंत गोपनीय टोटके दिए जा रहें हैं. ये प्रमाणिक  हैं और इनके प्रभाव  चमत्कारी होते हैं. धन की  कमी -> किसी  परिवार में धन की कमी हो रही है, यो पत्नी, माँ या बहन, जो

ज्योतिष से समस्या समाधान

हम पहले बता आये है कि ‘धर्मालय’ का सम्पूर्ण धार्मिक , तांत्रिक या प्राचीन विद्याओं से सम्बन्धित आधार अग्नि प्राचीन शास्त्रीय रूप में है; जो वैज्ञानिक आधार पर खड़ा था। इस रूप में समस्याएं दूर करने के लिए कारण जानना आवश्यक होता है। निदान कारण का किया जाता है। यही

मनोकामना पूर्ती अनुष्ठान

पीपल अनुष्ठानकिसी पीपल के दो साल के लगभग के पेड़ के चारों ओर से कोड़ करके वहां की मिट्टी हल्की कर दें।  दायरा सात हाथ की त्रिज्या में लें।  इसके चारों ओर ऊँची मेढ बना लें; ताकि जल बह न जाए।सोमवार के प्रातःकाल इसमें मंत्र पढ़ते हुए बड़े-से घड़े पानी

पारद श्री चक्र स्थापना और पूजन विधि

स्थापना और गुरु नमन – हमारे यहाँ से जो श्री चक्र भेजा जाता है; वह पंचगव्य और नारियल पानी से शास्त्रानुसार अभिषेक करके गुरु पादुका यन्त्रों से पूजित और 540 श्री मंत्र से सिद्ध किया होता है; इसलिए इसकी विशेष सिद्धि या शुद्धि की आवश्यकता नहीं होती। इसे ताम्बा

यंत्र और ताबीजों से चमत्कारिक फलों की प्राप्ति कैसे होती हैं?

इस पर हम पहले भी प्रकाश डाल चुके हैं। हमारी वेबसाइट धर्मालय में इसका पूरा विज्ञान  वर्णित है। बहुत से लोग इसे केवल डायग्राम समझते हैं और अनेक प्रसिद्ध धर्मगुरु भी इसे डायग्राम बताते हैं; पर प्रसिद्धि प्राप्त कर लेने से कोई ज्ञानी नहीं हो जाता। एक आइटम सॉंग पर

पूजा गृह और उसमें यंत्रों की स्थापना कैसे करें?

घर में पूजा गृह समतल छतवाली बनानी चाहिए। शंकु के आकार की गोल छतवाला पूजा गृह घर में बनाना उचित नहीं है। इसे अशुभ समझा जाता है। पूजा गृह का स्थान ईशान कोण (पूर्व+उत्तर) होता है; परन्तु यहाँ स्थान न होने पर इसे नैऋत्य में भी स्थापित किया जा सकता है।

पिरामिडों से भाग्य कैसे प्रभावित होता है?

इनसे भाग्य पर परोक्ष प्रभाव पड़ता है। पिरामिड धातु एवं पत्थरों का होना चाहिए। इसमें तन्त्र के ‘अभाव’ का सूत्र काम करता है। इस विश्व के कण –कण में अभाव है और सभी अपने अभाव के समीकरण में वातावरण से ऊर्जा प्राप्त कर रहे हैं। इसी से सबका अस्तित्त्व है।

क्या मंत्र जपने या ताबीज बाँधने से परीक्षा में सफलता प्राप्त होती है?

(इच्छा, क्रिया और ज्ञान) यह एक अच्छा और उपयोगी प्रश्न है। इसे प्रत्येक छात्र-छात्राओं को जानना चाहिए। बल्कि इसे प्रत्येक स्त्री-पुरुष को जानना चाहिए, जो भिन्न-भिन्न पेशे में लगे हैं। तंत्र का एक शाश्वत सूत्र है। इसका कहना है कि प्रकृति में शक्ति (ऊर्जा व्यवस्था) का संचार चल रहा है, उसकी तीन

पति रूप यक्ष सिद्धि साधना यंत्र

यक्ष की सिद्धि भी उनके रूप ध्यान, मन्त्र एवं यंत्र पर की जाती है। इस यंत्र एवं मंत्र पर किसी भी देवता को पतिरूप में सिद्ध किया जा सकता है। यह एक गुप्त विद्या है। कहते है कि दुर्वासा ऋषि ने कुंती को यही मंत्र और यंत्र दिया था। इसी

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