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धर्मालय > किसको इष्ट बनायें ?

लक्षणों से ग्रह की खराबी ज्ञात करना

किसी मनुष्य के जीवन में कौन-सा ग्रह अशुभ प्रभाव दाल रहा है, इसका औसत निर्धारण उसके जीवन में घटने वाली घटनाओं के आधार पर भी ज्ञात किया जा सकता है | विभिन्न ग्रहों की अशुभ स्थिति पर निम्नलिखित लक्षण प्राप्त होते हैं – 1-सूर्य- तेज का अभाव, आलस्य, अकड़न, जड़ता,

ग्रहों की मित्रता – शत्रुता

क्रo नाम ग्रह उसके बराबर के ग्रह उसके दोस्त ग्रह उसके दुश्मन ग्रह 1. बृहस्पति राहू, केतु, शनि सूर्य, मंगल, चन्द्र शुक्र, बुध 2. सूर्य बुध जो सूर्य के साथ चुप होगा बृहस्पति, मंगल, चन्द्र शुक्र, शनि, राहु से ग्रहण, केतु से मध्यम 3. चन्द्र शुक्र, शनि, मंगल, बृहस्पति सूर्य, बुध केतु से ग्रहण, राहु से मध्यम 4. शुक्र मंगल, बृहस्पति शनि, बुध, केतु सूर्य, चन्द्र , राहु 5. मंगल शुक्र, शनि, राहु

ग्रहों के देवी-देवता, वर्ण एवं इष्ट

ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह स्वामी देवता हैं | वास्तव में, ज्योतिष के ग्रह औघड़नाथ तंत्र के ऊर्जा चक्र ही हैं | इनके नाम पर सौर्यमण्डल के सूर्य एवं ग्रहों का नामकरण करने से ऐसा भ्रम उत्पन्न हो गया है कि ये सौर्यमण्डल ग्रहों के नाम हैं | इन ग्रहों के गुणों

कैसे करें इष्ट देवी-देवता का चुनाव

ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति से – प्रत्येक व्यक्ति की जन्मकुंडली नहीं होती, परन्तु अधिकांश की होती है | यदि नहीं है और जन्म की सही तिथि और समय ज्ञात है, तो बनवा लीजिये | इसमें ग्रहों की स्थिति देखिये | केवल दुर्लभ ग्रहों के देवता की पूजा कीजिये |

किस देवता की पूजा की जाये

हमने देखा है कि पूजा एवं अनुष्ठान के सम्बन्ध में भारत के घर घर में भारी अनिष्ट का कार्य किया जा रहा है. लोग अपने कल्याण और सुख-समृद्धि के लिए देवी-देवता की पूजा करते हैं, परन्तु उन्हें यह ज्ञात नहीं कि पूजा द्वारा वे अपने अनिष्ट और भाग्याविकार को आमंत्रित

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